मुक्तक….अमरेश सिंह भदौरिया

१.

फूलों से दोस्ती काँटों से प्यार लिख रहा हूँ।
दिल का हाल पहली बार लिख रहा हूँ।
अधपके बाल हैं और उम्र है चालीस की,
उस पर कमाल ये कि शृंगार लिख रहा हूँ।

२.

जीवन जीने की यहाँ जिसमें कला है।
सच मानिए! आदमी वो ही भला है।
वक्त पर न समझे जो वक्त की नज़ाकत,
वक्त ने वक्त पर यहाँ उसे ही छला है।

अमरेश सिंह भदौरिया

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