खुद को मैं इस तरह बदल रहा हूँ

खुद को मैं इस तरह बदल रहा हूँ।
आग में लोहे की तरह फ़िसल रहा हूँ।
दोष न आ जाय कहीं मुझमें भी बुलंदी का,
इसलिए फुटपाथ पर अबतक मैं चल रहा हूँ।

 

अमरेश सिंह भदौरिया

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