मेरे जीवनसाथी

तुम आस-पास जब रहते हो, ये फिजा महकने लगती है ,

होठो पे हँसी खिल जाती है , आवाज़ चहकने लगती है |

दिखते हो नही जब महफिल मे, आखे उदास हो जाती है ,

तेरे आने की आहट से, खुशियों से चमकने लगती है |

जब पास बुलाते हो मुझको, तब दिल यह धडक सा जाता है,

चेहरा गुलाब हो जाता है , सासे भी बहकने लगती है |

चेहरे से हटा कर आचल को ,माथे पे लबों को रखते हो ,

मायूस पड़ी मेरी बिदिया पुरजोर दमकने लगती है |

जब कभी ख्याल यह आता है, तुम साथ हमारा छोडोगे,

धडकन ये हमारे सीने की, कुछ तेज धडकने लगती है |

 

 

                                              डॉ श्रुति मिश्रा

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