हवा भी है बदली और मौसम बदल रहा है

हवा भी है बदली और मौसम बदल रहा है।
ख्वाब अनमना-सा कोई दिल में पल रहा है।
रिश्तों की जमी पर आजकल कुछ नमी बढ़ी है,
मैं भी फ़िसल रहा हूँ और तू भी फ़िसल रहा है।

 

अमरेश सिंह भदौरिया

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