ये कैसा है रामराज्य

जो सारी धरती का स्वर्ग कहलाता है कश्मीर,
दहशत की आग में आज जलता जा रहा है ।

उद्योगों से सज रहे है देखो अनेको नगर,
गंगा का पावन जल अमृत से विष बनता जा रहा है ।

बेरोजगारी से तंग आ गया है बेरोजगार,
यहाँ हर इंसान प्रदूषण से खोखला होता जा रहा है ।

पुरखो से राम राज्य का पाठ पढा है हमने,
जहाँ गण और तंत्र आपस में लङे जा रहा है।

पापी रावण का आज भी हो रहा है रथ पे गुणगान,
आज भी रावण प्रजा को नित रुलाये जा रहा है।

कभी अपनाते थे राम के आदर्शो को सब,
वहाँ शहीदो का आँकङा आज बढ़ता जा रहा है।

कितने ही मंदिर बनवालो तुम राम भगवान के,
पहले जैसा राम राज्य ना फिर आ पाएगा।

इस कलियुग की हैवानी दुनिया में,
कौन सच्ची इंसानियत को जगा पाएगा।

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युवा कवयित्री
शालू मिश्रा, नोहर

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