झोले में रखे बहुत से माल चुनावी है

झोले में रखे बहुत से माल चुनावी है
साहब को पता है ये साल चुनावी है

उनके पास अब सिर्फ रेशम के तौलिये हैं
उस गैंडे की ये नई नई खाल चुनावी है

वैमनस्य के चूल्हे में कई बार पकाई है
अब भी पकेगी उनकी ये दाल चुनावी है

ताजमहल बनवाने की जगह निकाल लेंगें
उनके पास ऐसा एक एक बाल चुनावी है

भोले पंछी फिर बहस में उलझे मीडिया/सोशल मीडिया पे
रिंग मास्टर ने ऐसा फ़ेंका जाल चुनावी है।—विपुल त्रिपाठी

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