संकल्प सृजन का लेकर

संकल्प सृजन का लेकर
कलम सिपाही चलता है।
अपने मज़बूत इरादों से
हर परिदृश्य बदलता है।
घोर अमावस में काली
रातों की स्याही छंटती है,
जहाँ में फिर कहीं दीप
दीवाली का जलता है।

 

अमरेश सिंह भदौरिया

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