किसी को हार मिली यहाँ

किसी को हार मिली यहाँ
किसी के हिस्से जीत रही।
वसुधैव कुटुंबकम की
जहाँ सनातन रीति रही।
जिंदगी का फ़लसफ़ा यूँ
आजकल उलझा हुआ है,
कलह से होती सुबह और
शाम सुलह में बीत रही।

 

अमरेश सिंह भदौरिया

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