ख़्वाब मुझको ज़िन्दगी का क्यों दिखाया आपने

ख़्वाब मुझको ज़िन्दगी का  क्यों दिखाया आपने,
तोड़ना ही  था अगर  दिल  क्यों  मिलाया आपने।
आपको  जब  साथ  मेरा  ही  न  था   मंज़ूर  तो,
साथ मेरा अब तलक फिर क्यों  निभाया आपने।

मौत  भी  आती अगर  हँसकर  लगा  लेता गले,

पर  भरोसे  का  जनाज़ा  क्यों   उठाया  आपने।

आपसे उम्मीद भी अब  हम  वफ़ा की  क्या करें,

बेवफ़ाई  की  अलख  को  जब   जगाया आपने।

हो   मुबारक   आपको   दौलत-भरी   रंगीनियाँ,

मुफ़लिसी  का  रास्ता  हमको   दिखाया आपने।

अंजुमन  में  टूटकर  बिखरे  पड़े  हैं  ख़्वाब  सब,

साज़िशों   से  ‘राज  जब   पर्दा  उठाया  आपने।

 

राजेश जैसवारा  ‘राज जौनपुरी ‘

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