चमन प्यार का तुम सजाना कभी

चमन प्यार का तुम सजाना कभी,
महब्बत भरे गुल  खिलाना  कभी।

अगर प्यार में हो ख़ता जो कभी,
भुलाना, न दिल से लगाना कभी।

गए साल हम तुम मिले थे जहाँ,
वहीं था हमारा  ठिकाना  कभी।

बड़ी  क़ातिलाना, निगाहें   मगर,
अदाएं दिखा दिल लुभाना कभी।

अगर ज़िन्दगी में तुझे ग़म  मिले,
उसे साथ हर्गिज़  न लाना कभी।

करो  काम  ऐसा   मिसालें  बने,
करे याद जिसको ज़माना कभी।

बहुत मनचला राज  अब तू न बन, 
ज़माना  न  समझे  दिवाना  कभी।

 
 
 
 

 राजेश जैसवारा  ‘राज जौनपुरी ‘

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