इस तरह तुम हमें आजमाना नहीं

इस तरह  तुम हमें आजमाना  नहीं,
पास  आकर  मेरे  दूर  जाना   नहीं।

है  तुझी से जुड़ी अब  मेरी  ज़िंदगी,
फ़ासिला तुम दिलों का बढ़ाना नहीं।

अब  तुम्हारे   हवाले   मेरी   ज़िंदगी,
दर्द  से  तुम  इसे  तो  सजाना  नहीं।

आपका  शुक्रिया  आपसे  जो  मिला,
प्यार का वो सबक अब भुलाना  नहीं।

छोड़   दूँ   मैं  जहां आपही  के  लिए,
यूं   हमें   प्यार  में   बरगलाना   नहीं।

है   भरोसा   तुम्हें   तो  रहे  याद   ये,
प्यार में तुम कभी दिल दुखाना  नहीं।

है  ख़ुदा का  करम जो  मिले हम  यहाँ,
बात  ये  तुम  कभी  भूल  जाना  नहीं।

अब तलक जो हुआ  तू उसे भूल जा,
भूल  ये  फिर  कभी   दोहराना   नहीं।

इल्तिज़ा  है  मेरी  बस  यही  आपसे,
ज़िन्दगी  को  जहन्नुम   बनाना  नहीं।

हरकतें   आपकी   क़ाबिले   दाद  हैं,
राज  इनपे  कभी  भाव  खाना  नहीं।

 

राजेश जैसवारा  ‘राज जौनपुरी ‘

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