——————
बोल जम्हूरियत के ख़ुदा
इस बार क्या तू फ़ैसला दे ?

सियासत के जलजले से
सबको आजाद करादे !

बिजली पानी भले न मुफ्त दे
तसल्ली का लिबास देदे !

बन्दे आवारा, खुदा हो गए हैं
उनको उनकी औकात बतादे !

मोहब्बत का निजाम देदे
इश्क का हाकिम दिला दे !

खुशबू घोल बंबई के बाबू में
दोस्ती से सारी रंजिशे मिटा दे !
——————————————–
विश्वनाथ शिरढोणकर , इंदौर म. प्र .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Google+
http://swargvibha.in/onlinemagazine/2018/10/15/%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C">
Twitter
LinkedIn