पामीर तुम दुनिया की छत नहीं हो 
अगर तुम दुनिया की छत होते 
तो मेरे कमरे की छत इतनी नीचे नहीं होती 
मेरे जैसे लोगों का दम घुटता है 
नीची छत वाले कमरों में 
मेरी गर्दन कभी सीधी नहीं होती 
बगल में रहने वाले लोगों को
मैं सर उठाये बिना 
आवाज़ से पहचानता हूँ 
अगर आवाज़ का कोई चेहरा होता
तो नीची छतों वाले कमरों में 
मैं लोगों को उनके चेहरे से नहीं / उनकी आवाज़ के सहारे नहीं
उनकी चाल से जानता 
किसी व्यक्ति को उसकी चाल से जानने के लिये
मुझे अंधेरे का इन्तजार नहीं करना होता  |

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