मुट्ठी भर सावन…Amit Kumar

मेरे पास तुम्हारे ख्बावों का
ना खत्म होने वाला आसमां है
जिसने दख़्ल कर रखा है
मेरे आज को
जिसने रातों को थपकियाँ देकर
मेरे प्यासी जमीं के टुकड़े पर
मखमली यादों के सेज का ख्बाव
दिखाता है
और सुर्ख हवाओं का बवंडर
उफान मचाता है
जो सावन की राह देखती है
अब इश्क ही मेरी दुनिया है
जिसके सूरज-चाँद तुम ही हो

मुट्ठी भर सावन
दे देना मेरे ख्बाव के अरमानों को
और हू-ब-हू लिख देना
दिल के कोरे पन्नों पर
विधि के सूत्र में
आमरण गांठ देकर
ताकि यकीं रहे कि महफूज हैं
तेरी सीने में मेरी साँसें

मुट्ठी भर सावन
मेरी माँग में रख देना
जिससे हरी-भरी हो जाए
मेरे यौवन की छोटी कली
जिसकी हिफ़ाजत में मैं
सुबह-शाम
सारी उम्र
कुमकुम पर लिखकर
तुम्हारा नाम
सजाती रहूं माथे पर

मुट्ठी भर सावन
मेरे बदन की
कोंपलों पर भी बरसाना
जिससे बना दूंगी मैं
एक निशानी
बिल्कुल तुम्हारे बचपन की
तस्वीर-सी
जिसके आ जाने से
फैल जाएगा नया सूरज
अपने आंगन में
और शरारतों के तोहफों से
नवाजता रहेगा
वह हर पल हमें।

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