जमी है अपनी आसमाँ है अपना

जमी है अपनी आसमाँ है अपना।
कहने को सारा जहाँ है अपना।
समझने जाती है दृष्टि दूर तक,
नज़दीक कौन यहाँ है अपना।

अमरेश सिंह भदौरिया

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