इंसानियत का पाठ पढ़ाती

मेरे सपनों में आ जाती हैं जब-तब
नदी-तालाब में तैरती 
पवित्र आत्मा मछली की

तो यदा-कदा
आकाश से पाताल नापती
डरकर भाग जाने वाली तितली की

कभी-कभार अपनी लंबी जबान पर
चिपकाकर कीड़े उदरस्थ करती
लिजलिजी धूसर रंग वाली  छिपकली की

यूं तो दिखने लग जाती है
अंधेरे से उजाले की तलाश करती
वह नीली आंखों वाली बिल्ली भी

पर सबसे ज्यादा आलोकित करती है
प्रभु राम की अंगुलियों का आशीर्वाद पाकर
विनाश के बजाय निर्माण का सबक सिखाती
इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाती
बगीचे में  इधर-उधर भागती  गिलहरी की
 

Jitendra Ved

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