सोच भी सयानी है और सयाने हैं लोग

सोच भी  सयानी  है  और  सयाने  हैं लोग।
कहने को  तो  सब   जाने-पहचाने  हैं लोग।
फ़ितरत क्या बदली इधर  जरा-सी हवा की,
कल तक जो अपने थे आज बेगाने हैं लोग।

अमरेश सिंह भदौरिया

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