लम्हा-लम्हा पढ़ लिया एक कहानी की तरह

लम्हा-लम्हा पढ़ लिया एक कहानी की तरह।
रख लिया दिल में उसे एक निशानी की तरह।
सुनहरी धूप के झरने-सा सहज दिन हो गया,
यादें बनी हैं सुरमयी-सी शाम सुहानी की तरह।

अमरेश सिंह भदौरिया

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