अचानक जवान हो जाती हैं बेटियाँ

अचानक जवान हो जाती हैं बेटियाँ
बुनने लगती हैं ख्वाब
बन जाएगी माँ-बाप की बैशाखियाँ
बन कर जल्दी ही साहब
दूर करेगी माँ-बाप की परेशानियाँ

पर मिल जाते हैं उन्हें दरिंदे
यूनिवर्सिटी  के पढ़े-लिखे बंदे
जो जीते हैं खाकर सियासती चंदे
मन से  होते हैं वे बड़े गंदे
उनसे पूछ नहीं सकती वे जवाब
दिमाग मेंं ही रह जाते हैं सब ख्वाब
सताने लगती हैं उसे ख्वाबों की नादानियाँ

होस्टल को होटल समझते हैं पुलिस वाले
तोड़ देते हैं बेटियों की अलमारी के ताले
देते हैं भद्दी-भद्दी गालियाँ
बिखेर देते हैं किताबें और कापियाँ
मन हो जाता हैं उनका बहुत खराब
किरचों की तरह चुभते हैं उन्हें ख्वाब
हलाकान करती हैं उन्हें चाहत की रूमानियाँ

और सियासत के गुर्गे कहाँ होते हैं कम
बरसाते हैं बेटियों के चरित्र पर सितम
किसी में होता है छ:तो बताता आठ का दम
हर लड़का लगता उन्हें लड़की का सनम
दुख का हर पल बहने लगता है सैलाब
पाँव के छालों की तरह जलते हैं ख्वाब
और पसीने से तरबतर हो जाती हैं पेशानियाँ

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