आग लगी है बस्ती में, मस्तराम मस्ती में

आग लगी है बस्ती में, मस्तराम मस्ती में
जिंदगी खत्म होती, यहां पर सस्ती में
 
पैमाने तो दिखाए थे मदहोश करने वाले
हर किसी को फंसा दिया, अखाड़े और कुस्ती में
 
दरदर खाक छान रहे लोग रोटी के लिए
वे उड़ रहे लड़नेलड़ाने की चुस्ती में
 
वक्त तो बीत जाएगा, जैसेतैसे यारों
बदनुमा दाग रह जाएंगे इस बस्ती में
 
मरी है इंसानियत, हयात है नादानियाँ

दस्तावेज, आंकड़े रह जाएंगे नस्ती में

 

 

 
Jitendra Ved

 

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