अपनी-अपनी सल्तनत है अपना-अपना ताज़ है

अपनी-अपनी सल्तनत है अपना-अपना ताज़ है
बस रहा जो दिल में सबके बस वही सरताज़ है
जिसके दम से नूर है, दृश्य में भी,दृष्टि में भी,
बस वही अंज़ाम है, बस वही आगाज़ है

अमरेश सिंह भदौरिया

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