बेटी की अहमियत

धन की लालसा
मन में
जगाते हो,
बेटी को पराया
धन
बोल गर्भ में
गिराते हो।
कहते है ,के बेटा
वंश बढायेगा,
यदि बहू न आई
आंगन
तो किलकारी
कौन गूंजायेगा।
हे मानुष यह
जघन्य अपराध ही
मनुष्य की हार है,
बेटी बिन न
चल सकता
घर- परिवार है।

 

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ)

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