ग्राडँ पा,यू वील बी गलेड टू नो देट माई सेल्फ वल्लभम फ्राम न्यूयार्क।
यू पुट माई नेम वल्लभम,बीकाज यू आर फोलोवँर आफ सरदार वल्लभ भाई पटैल।
ग्राडँ पा,आई डिस्लाइक न्यूयार्क।
मोम , डेड आलवेज बिजी इन हिज वर्क.ही गोज फार डयूटी इन मोरनीँगँ एँड कम्स इन लेट नाइट।बोथ डज हेव नो टाइम फार मी.
आइ हेव मेनी फ्रेडंस इन न्यूयार्क।दे आल बिलोगँस टू वेस्टर्न कल्चर।दे डू नाट लाइक देयर मोम एडं डेड।।एडं देयर मोम एडं डेड आलसो डज नोट लाइक देम।
ईटेबल्स आफ माई फ्रेडंस आर वेरी बेड।दे इट मीट डेली, दे टेक वाईन डेली। हाऊ केन आइ सरवाइव वीद देम।ग्राडँ पा,आई वाँट टू कम इँडिया।
आई वाटं टू लिव इन निमाना गाँव फार सम टाइम।आई वाटं टू डू वंर्क फार डेवलपमेँट आफ निमाना विलैज थ्रू लोकल एडमीनीस्ट्रेशन।आई हेव लोट आफ पाकेट मनी।आई वाटं टू डू दिस एक्सपेसेँज इन कम्पूटराइजेशन एजूकेशन इन निमाना विलेज।
ग्राडँ पा,काल मी एट वसँ निमाना विलेज।आई लव कल्चर आफ निमाना वेरी वेरी मच।
कुछ समयातँरण न्यूयार्क से मेल आया
ग्राडँ पा, आई एम कमीगँ इन इडिँया इन ए शोर्ट वायल।

 

 

अब मेरा परिचय:

 

मैँ वल्लभम का दादू।अवकाश प्राप्त प्रिँसीपल।उस समय का प्रिँसीपल जब लोग टीचर्स का आदर करते थे।टीचर्स पर भरोसा रखते थे।नहीँ तो आजकल छात्रोँ को जरा सा झाड़ने फटकारने मात्र से ही पूरा मोहल्ला छोटे मोटे हथियार लेकर मरने मारने पर उतारू हो जाता हे।मेरा पुत्र पढ़ने लिखने मेँ बेहतर था।अत: वो एम.बी.ए.करके आगे पढ़ाई के लिये न्यूयार्क चला गया।
जैसा हमैशा होता आया हे,यहाँ भी वैसा ही हुआ। मेरे पुत्र को वहा की एक अँग्रेज लड़की पढ़ाई के दौरान पसँद आ गई।दोनो ने आपसी रजामँदी से शादी करली।कुछ समय के लिये वो निमाना गाँव भी आए।फिर वापिस न्यूयार्क चले गए।समयातँरण उनके एक पुत्र हुआ।उन्होने मुझसे कोई भारतीय नाम पूछा।मैँ सदा से ही सरदार वल्लभभाई पटैल का प्रशँसक रहा हूँ।सो मैँने उन्हेँ वल्लभम नाम सुझा दिया।इस नाम को उन्होने मान भी लिया।
वो पहली बार निमाना आरहा था।हाँलाकि उस समय निमाना का रास्ता सही नही था।दिल्ली से पहले रामगँजमँडी ट्रेन से आओ,फिर पैदल या बैलगाड़ी से निमाना आओ।किसी प्रकार वो अचानक निमाना आगया।उस समय सँचार साधनतोथेनही.खैर!खाना खाते खाते उसने कह दिया कि ग्राडँ पा, टूमारो आई विल गो टू डू वर्क वीद यू।
तूम यहाँ की दिनचर्या मेँ नही ढल पाओगे।यहाँ भारत मेँ हरेक गाँव मेँ नियमित सुद्दढ़,सश्रम दिनचर्या हे।किसी भी काम मेँ शहरोँ जैसी सुविधा नही हे। यहाँ बहुत कठोर श्रम है।
आई केम हियर टू लर्न समथिँग।
तुम्हेँ बस 5 दिन मिले हेँ,तुम क्या सिखेगा,तुम क्या क्या करेगा?
आई विल लर्न श्योर एँड सरटेन।
अगले दिन मैँ तो उठ गया,अपना काम करने चला गया।जब वपिस आया तो
वल्लभम पेस्ट करता मिला।
क्योँ भई,लँच का समय हो रहा हे?
सारी!टूमारो आई विल वेक अप सून।
मैँने देखा कि वल्लभम रात भर सोया ही नही।
सवेरे चार बजे वो मेरे साथ दिनचर्या का काम करने निकल गया।पहले तो मैँने गौशाला पहुँच कर गायोँ का दूध निकाला,मैने वल्लभम को मात्र कैवल देखने ओर सहयोग करने को कहा।
फिर दूध वाले को दूध देने भेज दिया।फिर तालाब की पाल पर शौच हेतु चले गए।खुले मेँ शौच बाबत मैनेँ उसे पहले ही बता दिया था।उसे बहुत बुरा लगा,किँतु क्या करता?
फिर हम सूर्योदय से पूर्व योग करने हेतु नीम के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर चले गए।यहाँ लगभग एक घँटा कठोर योगा किया।वल्लभम ने कौशिश तो की,एक,दो बार वो लुड़क भी गया।लैकिन हँसी मजाक मेँ सब टाल दिया।
फिर हम पहलवानी हेतु अखाड़े मेँआ गए , हम सभी लँगोट बाँध कर पहलवानी करने लगे। पहले वल्लभम को शर्म आई,फिर भी वो उल्टी सुल्टी लँगोट पहन कर मलखँब करने लगा।एक दो बार उसकी लँगोट भी खुल गई।अब उसे बुरा नही लग रहाथा।गाँव के कई युवा ओर भीड़ उसे उत्साहीत कर रही थी। निमाना मेँ पहली बार अग्रेँज आया था।सभी ओर ख्याति फेल चुकी थी।सभी उससे हाथ मिलाना चाह रहे थे।वो भी सबसे हाथ मिला रहा था।अब वो जीवन मेँ उत्साह महसूस कर रहा था।वो भी सबसे बहुत हिलमिल गया था। फिर बावड़ी मेँ प्रात:स्नान करने निकल गए।बावड़ी के पास ही तगारी मेँ काली मिटटी और छाँछ का मिश्रण तैयार था।सभी ने कपड़े उतार कर लँगोट मेँ ही आखोँ को छोड़ कर पूरे शरीर पर लेप लगाया।आधा घँटे सभीध्यान करने बैठ गए।वल्लभम को अजीब सा लगा किँतु वो उत्साहीत था।आधे घँटे बाद हम सभी बावड़ी मेँ उपर से छलाँग लगाकर नहाने लगे।वल्लभम से एसे नहाते नही बना तो पास ही बनी पानी से बहती खेल मेँ जग देकर स्नान करने को कह दिया।वो उसमेँ कूद कूद कर नहाया।
अब तरोताजा होकर हम पास ही पाठशाला मेँ चले गए।यहाँ मैँ (निस्वार्थ) अवैतनिक सेवा से बारहवीँ के स्टूडेँटस को पढ़ाता था।कार्यालय का भी काम करता था।पाठशाला मेँ सभी मेरी इज्जत करते थे।एहसान भी मानते थे।वल्लभम ने भी कुछ क्लासेज अँग्रेजी की पढ़ाई,किँतु वो स्टुडेँटस मेँ अज्ञान से नाखुश था ।कुछ ही दूरी पर हमने लाइब्रेरी सँचालित कर रखी थी।वहाँ काम देख कर घर आ गए।दिन का एक बज चुका थ।खाना खाकर जरा आराम किया।चार बजे के आस पास उठ कर चाय पीकर गौशाला मेँ काम किया। पाँच बजे स्कूल कम्प्यूटर रूम मे जाकर वहाँ की गतिविधी ओर ग्राउँड मेँ जाकर खैल कूद की गतिविधीयाँ देखीँ। स्टूडेँटस को मोटीवेट किया। छ:बजे के आस पास गाँव की चौपाल मेँ नीम के पेड़ के नीचे गाँव के प्रबुद्ध जनोँ के साथ बैठ कर गाँव के विकास के बारे मेँ विचार विमर्श किया। बैठक मेँ आरोप प्रत्यारोप ज्यादा थे। वहीँ पर मेरी पुर्वानुमति से वल्लभम ने ग्राम पंचायत मेँ 5 हजार डालर कम्पयूटरलेब बाबत और 5 हजार डालर निमाना मेँ स्थान स्थान पर चल शौचालय बाबत जमा करवा दिये।सभी ने बहुत तालीँयाँ बजाईँ। 8 बजे घर आये।हाथ मुहँ धोकर अन्य क्रियाओँ से फ्री होकर न्यूज सून कर सोने लगे।मैँने देखा कि वल्लभम थका थका सा हे,किँतु उर्जावान हे।
देखते दखते चार दिन निकल गए।मेरे साथ उसने चोबीस घँटे साये की तरह काम सीखा।मुझे भी एक प्रकार से इस अँग्रेज लड़के से कठोर अनुशासन, कड़ी मैहनत की आशा नही थी।वो भलेँही दूर देश से अपने ननिहाल आया था।लैकिन यहाँ आकर दिन रात कठोर मेहनत मेँ लग गया।देखते देखते उसका जाने का समय आ गया। निमाना मेँ ओर उसके आस पास उसके बहुत सारे छोटे बड़े दोस्त बन चुके थे।वो सभी पैदल ओर बैलगाड़ी मेँ रामगँजमँडी ट्रेन पर छोड़ने आए थे ,प्लैटफार्म पूरा भरा हुवा था।ट्रेन आने मेँ समय था।सभी माला पहना चुके थे।
उसने चबुतरे पे खड़ा होकर भाषण दिया:-ब्रदर्स,आई केम हीयर ओनली फार वन डे। आई वाँट टूरीज्म फार बेलेँस फोर डेज। आई विल रिमेँबर आल आफ यूअर अफेक्शन एँड लव। आई नोटेड मेनी कपँलेटँस जस्ट एज टायलेट,वाटर,स्कूल,हास्पीटल,
कनेक्टीवीटीरोड़,कम्पयूटर एजूकेशन।यू हेव टु राइट,एँड फोलो अप वीद लोकल एडमीनीस्ट्रेशन फार अबोव। आई विल आलसो कनेक्ट वीद यू फार अबोव केसेज फार 24 हावर्स।
वी विल गोट आल आफ अबोव।
नाउ,गुडबाय माइ फ्रेडंस।मीट यू सून निमाना,डोँट फोरगेट मी।आई विल कम बेक निमाना,आई विल कम बेक।

 

 

विजयकाँत मिश्रा,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Facebook
Google+
http://swargvibha.in/onlinemagazine/2018/09/17/%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%AE">
Twitter
LinkedIn