अगर जो देखो मेरी नज़र से |

अगर जो देखो मेरी नज़र से |
दिखे नज़ारे जवां क़मर से |

तुम्हारी नज़रों के आइने में –
दिखे हैं लाखों घने भंवर से |

बसा लो दिल में ये प्यार मेरा
बहार गुजरेगी तेरे दर से |

न ज़िंदगी यूँ उदास होगी –
सफ़र शुरू कर नयी डगर से |

भला वो परवाज़ क्या भरेगा –
डरा उचाई के जो शिखर से |

कदम बढाने से जो हिचकता –
वो पार पाये न फिर सफर से |

यकीन जिसको है खुद के दम पर
वही बचेगा बुरे असर से |

अमावसी रात ढल सकेगी –
बिखर पडे चाँदनी पहर से |
मंजूषा श्रीवास्तव

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