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अंक:  जून 2018   


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है उनकी शानोशौकत एक तमाशा-----विश्वनाथ शिरढोणकर

 

 

तमाशा
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है उनकी शानोशौकत एक तमाशा
और अंदाजे फकीरी भी एक तमाशा !

 

गरीब की झोपडी में दावत का तमाशा
उम्मीद की रोशनी में अँधेरे का तमाशा !

 

बने नहीं कभी किसी के भी हमसफ़र
भूखेनंगो के साथ सफ़र का एक तमाशा !

 

कहते है सबकी जल्द ही तक़दीर बदल देंगे
उनकी राह पकड़ कोई बन गया एक तमाशा !

 

अल्ला रहम कर, कहते है सादगी से रहेंगे
सादगी के महँगे इंतजामात का एक तमाशा !

 

उनका हर राज सियासत का तमाशा
खुले तो बन मुल्क बना एक तमाशा !

 

चर्चे के लिए रखते है हरदम जमी पे पैर
भीड़ में खोने की उनकी सनक एक तमाशा !

 

भेड़ बकरियों का नहीं यकीं तमाशो पे
हैरत से देखती है तमाशे के लिए तमाशा !

 

 

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