TOP BANNER

TOPBANNER







flower



mar 2017
कविताएँ 

आलेख

गज़ल

मुक्तक

हाइकु

कहानी





संस्थापिका एवं प्रधान सम्पादिका--- डॉ० श्रीमती तारा सिंह
सम्पादकीय कार्यालय--- --- 1502 सी क्वीन हेरिटेज़,प्लॉट—6, सेक्टर—
18, सानपाड़ा, नवी मुम्बई---400705
Email :-- swargvibha@gmail.com
(m) :--- +919322991198

flower5

rosebloom





 

 

 

अंक:  जून 2018   


LOGO



redrose



flowers1



tulips










flower3



valrose

"जलवायु परिवर्तन - ग्लोबल वार्मिंग "---सुखमंगल सिंह

 

 

जलवायु परिवर्तन ,औसतन मौसम में आने वाले बदलाव (परिवर्तन ) की स्थिति को माना जाता है | प्राकृतिक वातावरण में निम्नलिखित गैसों का बढना |
१-कार्बन डाईआक्साइड- जो कार्बन और आक्सीजन से मिलकर बनने वाली गैस होती है जो जगत के प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |
२- सल्फर डाइआक्साइड - वह गैस जो सल्फर और आक्सीजन से मिलकर बनने वाली गैस होती है | जिसके प्राकृतिक वातावरण में बढ़ने पर जन जीवन पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं |
३- कार्बन मोनाक्साइड - कार्बन और आक्सीजन से मिलकर बनने वाली मिलकर बनाने वाली यह भी जीवन के लिए हानिकारक गैस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है |
४- नाइट्रोजन डाइआक्साइड - यह गैस नाइट्रोजन और आक्सीजन से मिलकर जीवन को प्रभावित करती है | हानिकारक गैस है |
उपरोक्त क्रमांक एक से चार तक गैसें प्राकृति वायुमंडल में मिलकर आक्सीजन के अनुपात को कमतर कर देती है | जो प्रदूषण को बढ़ावा देता है वायुमंडल प्रदूषित हो जाता है | (१)
इन गैसों के कारण जलवायु परिवर्तन की परिकल्पना की गई है |न वैश्विक तपन जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख कारण है |(२) अल्प राजनीतिक स्वार्थ के कारण प्रकृति का दोहन भी जलवायु परिवर्तन की वजह बनती रही है |
जीवन की सार्थकता और जटिलता की कल्पना की अभिव्यक्ति पर साहित्य का सृजन होता है | साहित्य का सृजन ,प्रकृति और समाज के समन्वय के साथ होता है |
वातावरण और खान-पान विचारों में परिवर्तन लाने का प्रमुख काम करता है | कहने का तात्पर्य यह है कि अपनी बल बुद्धि को शुद्ध रखने के लिए हमें अपने खाने वाली वस्तुओं की शुद्धता का भी ध्यान देना आवश्यक है |खान - पान की शुद्धता की कमी भी क्रूरता को जन्म देने का मार्ग प्रसस्त कटे हैं | कर्म से तप की उत्पत्ति होती है |(३)
सुकर्म करना मानव धर्म है | इस सृष्टि रूपी महासागर के मूल में तप और कर्म दो तत्व हैं |कर्म मानव को इंसान बनाता है | इंसान ज्ञान की खोज में तत्पर रहता है | ज्ञान को अर्जित करने के लिए हम तप और साधना करते हैं |(४)
ज्ञान रुपी अन्न से सारे शत्रु नष्ट होते हैं | यह लोकों का विजेता और स्वर्ग रूप है तथा सुख सर्वसुखदात्री कामधेनु का कार्य करता है | तप और परिश्रम से ज्ञानरूपी अन्न प्राप्त होता है | ज्ञानरूपी अन्न सत्य का मुख है |(५)यही कारण है कि
ग्यानी मनुष्य सत साहित्य का सृजन करता है |
काहे रे नालिनी तै कुम्हिलानी |
तेरे ही नाली सरोवर पानी ||
जल से उतपति जल में बास ,जल मैं नलिनी तोर निवास |
ना तल तपति न ऊपरि आगि,तोर हेतु कहू कासनि लाग ||
कहैं कबीर जे उदक समान ,ते नहि मुए हमारे जान ||(६)
संत कबीरदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि हैं, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। (७) कबीरदास जी ने सांसारिक प्राणियो को ज्ञान का उपदेश देते हुए कहा, अपनी रचना के माध्यम से'नालिनी ' को माध्यम बनाकर सारी जल -पानी जनित उत्पत्ति के उपरान्त मुरझाने की चिंता व्यक्त की |
साहित्यकार का परम कर्तव्य है की वातावरण में व्याप्त प्रदूषण की तरफ लोगों का ध्यान आकृष्ट कराये | प्रदूषण से होने वाले हानिकारक प्रभाव की तरफ ध्यान दिलाये | वायुमंडल में कार्बन की बढ़त और आक्सीजन की कमी का आकलन यद्यपि वैज्ञानिकों को मापना भापना है | परन्तु साहित्य कार यह कहकर की यह कार्य वैज्ञानिक का है | पलड़ा झाड लेना सर्वथा उचित नहीं ठहराया जा सकता | वायुमंडल में प्राणघातक गैसों की अधिकता से जीवन प्रभावित होता है | घातक गैसों की अधिक मात्रा पेड़-पौधों को भी हानि पहुचाते हैं |
शारीरिक मानसिक बीमारियों से जन जीवन व्यग्र होता जा रहा है | इस बीमारी को जन्म देने में कारखानों से निकलने वाली गैस ,गाड़ियों के घूये आदि |
आज विश्व में नाभिकीय हथियारों का भंडार एकत्र होता जा रहा है | दुनिया का यह जखीरा किसी भी समय विनाश को आमंत्रित कर सकता है |
बात ग्लोबल वार्मिंग की हो रही है ऐसे में उत्तर कोरिया के ताना शाह कीबातें न ुनिया ,जीवन और साहित्य के लिहाज से उचित नहीं कही जा सकेगी | विगत दिनों उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी के सी एन ए पर जारी बयान ने जिसमें कमिटी ने कहा कि -'पास में जापान की मौजूदगी भी हमें नहीं चाहिए |' अमेरिका के चार द्वीपों को परमाणु बम के हमले से ख़त्म कर देने का दावा करते हुए अमेरिका को राख में तब्दील करने का दुस्साहसिक कदम उठाने पर बल दिया | यह उसका वक्तव्य वर्ष २०१७ में मीडिया में अंकित हुआ |
पाक में आतंकी संगठन फलफूल रहा है | आतंकिस्तान कहा जा सकता है | पाक में आतंकी संगठनों पर दबाव बनाने की अमेरिका की आवाज को पाक सरकार सदा नजरअंदाज करता रहा | जबकि समूचे विश्व को दहलाने का काम आतंकी संगठनों का संचालन पाक से संचालित होते रहते हैं | भारत के शान्ति सन्देश को धता बताते हुए लगातार जम्बू -कश्मीर में आतंकी घुसपैठिये को भेजकर आम आवाम को नुकशान पहुचाने का कार्य करता रहा है |जब कि पाक भी वर्ष १९४७ के पहले भारत का अंग रहा है |
जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण मनुष्य ही है। मनुष्य भी जिनका अपना पक्का मकान नहीं है और आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उन पर भी इसका बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।(८)
ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते विश्वभर में हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा है | जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सभी पर पड़ता है। लेकिन इसका सबसे अधिक प्रभाव जीव जन्तुओं और पेड़ पौधों पर पड़ता है। क्योंकि जलवायु परिवर्तन से कई प्राकृतिक आपदायें आने लगते हैं | जलवायु परिवर्तन का सबसे घातक प्रभाव किसान पर पड़ेगा। जो उद्यमी सबसे ज्यादा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कर रहे हैं |(९)
भारत और जापान के भावी रिश्ते को प्रधान मंत्री शिंजो एबी ने अपने शव्दों में कहा- 'मोदी और मैं (एबी) यह तय किया है कि हम 'जय-जापान ,जय-भारत 'को सच सावित करने के लिए तय दिशा में काम करेंगे |हम एशिया को एक साथ ही बैश्विक स्टार पर शान्ति के लिए काम करेंगे और शान्ति को बढ़ावा देंगे |
भारतीय प्रधान मंत्री मोदी ने इसे व्यापक रूप देते हुए कहा- 'हमारे बीच विशेष रणनीतिक व् वैश्विक साझेदारी से जुड़े मुद्दे सिर्फ क्षेत्रीय या द्विपक्षीय हितों तक ही सीमित नहीं है बल्कि हम तमाम वैश्विक मिद्दों पर भी करीबी सम्बन्ध कायम करने को तैयार हैं | नये युग की आधार शिला की शुरुआत दोनों नेताओं (समकक्ष ) के साझा बयान ,भारत-जापान रिश्तों ने शुरू किया |(१०) शिंजो एबी ने जापान के जे .ए. और इंडिया के आई को जोड़कर जय का प्रतीक बताया और कहा -कि भारत के मानव संसाधन और जापान की तकनीक द्वारा दुनिया का उत्कृष्ट कारखाना बनाने की क्षमता है | आगे कहा दोनों देश मिलकर काम करेंगे तो कुछ भी असंभव नहीं हो सकता है |(११)
भारत के प्रधान मंत्री मोदी और जापान के प्रधान मंत्री शिंजो एबी के संयुक्त द्विपक्षीय बैठक गांधी नगर गुजरात में हुई |भारत में बुलत ट्रेन चलाने पर भी चर्चा हुई | इसे मूर्ती रूप मिल जाने से जलवायु परिवर्तन में बहुत हद तक कमी दर्ज की जा सकी | कोयले डीजल से चलने वाली ट्रेने, बसें ,टैम्पू आदि में दूरी तय करने में कमी दर्ज की जा सकती है | कार्वन उत्सर्जन में कमी आयेगी |इस मौके पर पंद्रह महत्वपूर्ण समझौते हुए | दोनों देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किये |(१२)
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो ने ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई में कहा 'िश्व पिछड़ रहा है ' चिंता जताया |यह बात उनहोंने पेरिस जलवायु सम्क्जौटे की दूसरी वर्ष गाँठ २०१७ के मौके पर कही |'वन प्लैनेट सम्मलेन' में कहा |सम्मलेन में करीब १९५ देशों ने हस्ताक्षर किये | इस्सम्मेलं में संकल्प लिया गया जलवायु परिवर्तन में कमी लाने के लिए |कार्वन उत्सर्जन में कमी लाने का |मैक्रो ने कहा कि 'पर्यावरण को बचाने के लिए हम लोगों को लिए गए सम्मेलन में फैसले के संकल्पों को साकार रूप देने की दिशा में प्रयत्न करना होगा ताकि आने वाली अपनी संतति को स्वस्थ्य और स्वच्छ धरा प्रदान कर सकें |
संयुक्तराष्ट्र के महासचिव श्रीमान एनटिनियो गुतेरस ने जलवायु पर काबू पाना हमारे लिए अहम चुनौती के रूप में स्वीकारा |
अतएव हे मानव कथित दानवता से विमुख होकर ज्ञान रुपी अन्न पकावौर विश्व विजय रुपी ज्ञान को शान्ति-सद्भाव -एकता और विश्व बंधुत्व के लिए फैलाओ, जिससे मानव और जीव -जंतु ,पशु-पक्षी ,पेड़-=पौधों का कल्याण हो | जीवन सुखमय हो | प्रकृति से प्रेम करो | जल;वायु परिवर्तन में कमी लाने का प्रयत्न करो | ग्लोबल वार्मिंग से लड़ो | विश्व समुदाय को जगाओ |
अनुक्रमणिका -
१-बी .एच .डी.एफ-१०१ इंदिरा गांधी रा.मुक्त वि वि पृष्ठ ८१
२- गूगल हिंदी की पथ से साभार
३,४,५ वही गूगल से साभार
६- हिंदी काव्य गंगा ,पृष्ठ २८,नागरी प्रचारिणी सभा
७- कबीर का जीवन परिचय भारत कोष गूगल से साभार
८- गूगल से साभार
९- वही
१०- वाराणसी/दैनिक जागरण सितम्बर१५,२०१७ मुख्य पृष्ठ से साभार
११व् १२ - वही

--

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...