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अंक:  जून 2018   


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लघुकथा : कांनमैन ------डां नन्द लाल भारती

 

 

ईमानचन्द नाम से ही नहीं सचमुच ईमानदार और जबान के पक्के थे।दहेज रूपी नरपिशाच के आतंक से घबराकर वे अपने बेटे की शादी योग्य लडकी से चाहे लडकी जाति की हो या परजाति की पर बिना दहेज़ की शादी करेंगे।दुर्भाग्यवश यह संकल्प उल्टा पड़ गया।लड़की के मां बाप ठग निकले,उन्होंने ने लडके को वशीभूत कर शादी का खर्चा लडके से ऐंठ लिया, किसी को कानों कान खबर नहीं लगी।डोली उठने से पहले ठगो ने तान दिया अपने मकान की एक और मंजिल मकान। इतना ही नहीं लड़की के ठग मां बाप ने ईमानचन्द के सीधे साधे बेटे को मदारी का बन्दर बना लिया,असभ्य कुलक्षणा बेटी की आड़ मे।
ईमानचन्द का कमासुत कुलभूषण छिन गया बिना दहेज की
शादी के गुमान मे। ईमानचन्द को वचन पर खरा उतरने के बदले ठग परिवार ने घोंप दिये ईमानचन्द की छाती म़े खंजर और दे दिये रिश्ते के नाम सुलगता दर्द जन्म जन्म के लिए ।
कहां कांनमैन फैमिली के चक्रव्यूह मे फंस गए ईमानचन्द कमासुत बेटे को मां -बाप घर -परिवार से अलग कर दिया रिश्ते के दुश्मन कांनमैन ने,बाबू ध्यान चन्द
कहते हुए माथा ठोक लिए ।

 

 

डां नन्द लाल भारती

 

 

 

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