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अंक: जून २०१७


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बसा दर्द तब दिल मुहब्बत हुई है----डॉ मधु त्रिवेदी

 

 

बसा दर्द तब दिल मुहब्बत हुई है
मिले चैन कैसे नदावत हुई है

 

चली पास आई जरा सा मिरे जब
मिली जब नजर तब हरारत हुई

 

गगन में लगी दूर उड़ने लगा पंख
बिछुड़ कर जहाँ से कयामत हुई है

 

सखी औ सखा सब लगे है चिढ़ाने
तभी तो मुझे अब ज़हानत हुई है

 

मंजूरी मिली इस जहाँ की हमें जब
मिलन को हमारे सलामत हुई है

 

चले जब बड़ो के कहे के नुसार
तभी ही दिलों आज बरकत हुई है

 

करे व्याह जब मान अपने बड़ों का
बुजुर्गों जनों की नसीहत हुई है

 

 

नदावत ~~पछतावा
जहानत ~~समझदारी

 

 

 

 

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