ONLINE HINDI MAGAZINE
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  जनवरी—-2013
             स्वर्गविभा
(www.swargvibha.in)
,नये-पुराने साहित्यकारों का वह मिलनमंच है ,जहाँ विश्व के कवियों ,लेखकों, गज़लकारों तथा उपन्यासकारों को ससम्मान एक मंच पर नि:शुल्क लाकर खड़ा करती है । केवल आदान मात्र मनुष्य को पूर्ण संतोष नहीं देता, उसे प्रदान का भी अधिकार चाहिये ,और इसी अधिकार का विकसित मंच है स्वर्ग विभा ।
       Swargvibha

(www.swargvibha.in) is the well known and popular Hindi Website which not only helps in propagation of Hindi, but also provides universal meeting grounds to the writers, poets, Gazalkars, story writers, critics and journalists. It publishes and propagates their best creations and writings free of cost to enable them to claim honour and laurels in the society.

वर्ष---1 , अंक-- 1

              

SAMACHAR

त्रिलोक सिंह ठकुरेला को 'राष्ट्रीय साहित्य गौरव ' सम्मान
काठमाण्डू में ’’अन्तरराष्ट्रीय साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अनुवाद का महत्व’’ विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

’’अन्तरराष्ट्रीय साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अनुवाद का महत्व ’’ पर आयोजित संगोष्ठी में  अमरेन्द्र सुमन सम्मानित

डा० तारा सिंह को महाकवि मानदोपाधि

श्री नन्दलाल भारती को विद्यावाचस्पति उपाधि

AALEKH

गुरु –पूर्णिमा- पूर्णता के प्रतीक....भारती दास
रामकाव्य और तुलसीदास..... डा० श्रीमती तारा सिंह
अनुवाद स्वतन्त्र विधा है .....डाँ नन्द लाल ’ भारती ’
नारी विमर्श.....संजना अभिषेक तिवारी

GAZAL

चमन में रहकर भी, बहार से दूर रहे हम ....डा० श्रीमती तारा सिंह
सरदी में झट से दे देती अपनी गरम रज़ाई माँ.....आर० सी० शर्मा “आरसी”
किताबों से निकल कर राम का आना जरूरी है....Shubham Jain
जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है....दीपक शर्मा

KAVITA

सिर्फ स्मृतियां शेष हैं जिसकी......ममतामयी....आर० सी० शर्मा “आरसी”
आतंकबाद .....भारती दास
अक्षय प्रकाश से दीन मनुज ....डा० श्रीमती तारा सिंह
स्वर्ण पदक और पापा ....पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

KAHANI

दद्दू का ठेलागाड़ी .......डा० श्रीमती तारा सिंह

क्षितिज के उस पार....देवी नागरानी
अमलतास के फूल...सुधीर मौर्या "सुधीर'
बंद दरवाजों के सच...संजना अभिषेक तिवारी
नन्हीं चींटी....संजय कुमार (भोपाल)

GEET

राष्ट्रगीत .....डा० श्रीमती तारा सिंह
इकोफ्रेँडली लोकगीत....मनीस पाण्डेय
कितने अच्छे लगते हो तुम...संजीव ‘सलिल’

 

 

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