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होली पर हाइकु---शशांक मिश्र ‘‘भारती’

 

 

1ः-
दूध में मधु
सा,काश! घुल पाते
इस होली में।

2ः-
रंग अनेक
बना देती है एक,
होली आकर।

3ः-
कांपे न धरा
उजड़े नहीं घर,
ऐसी हो होली।

4ः-
प्रेम का रस
सभी में है घोलती,
आकर होली।

5ः-
रंगों का पर्व
हंसी दे सबको,
हो भाईचारा।

 

 

 

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