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एक माँगो तो फ़क़त एक कहाँ देते--डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

 

एक माँगो तो फ़क़त एक कहाँ देते थे ॥
गाँव माँगो तो उठाकर दोजहाँ देते थे ॥
अब ज़माने में रहे दोस्त न पहले वाले ,
हँसते हँसते जो अपने दोस्त को जाँ देते थे ॥

 

 


-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

 

 

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