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mar 2017
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अंक: दिसम्बर २०१७


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आँखों में यदि खुद को----अमरेश सिंह भदोरिया 

 

आँखों में यदि खुद को
भी देखने का दम होता ।
न जाने आईने पर भी
कितना सितम होता ।
खुली हुई पलकों से हम
देखते जो सपने ;
जागने पर भी न कोई
टूटने का गम होता ।
_____________________
ख़ुशी आजकल कुछ
उदास रहती है ।
ख़ामोशी अब यहाँ
आसपास रहती है ।
कहने को हम जिंदगी
के अहसास बांटते है ;
और सच ये है कि खुद को
खुद की तलाश रहती है ।
_____________________

 

 

 

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