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july2015
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तेरे साये से लिपटकर,रात भर रोते रहे हम-डॉ० श्रीमती तारा सिंह

 

तेरे साये से लिपटकर ,रात भर रोते रहे हम
गमे-फ़ुरकत1में दिल का दामन भिंगोते रहे हम

 

है गम की शाम लम्बी, मगर यह शाम नहीं है
सहर2करीब है कहकर,दिल को समझाते रहे हम

 

दम लिया था जहाँ कयामत, सफ़र जिंदगी में
उस वक्ते-सफ़र को, उसे दिखाते रहे हम

 

कभी सब्र करता, कभी तड़पता दिल,कहीं रह न
जाये दिल का हबश डूबकर, सोचते रहे हम

 

कश्ती-ए-उम्र टूट-टूटकर किनारे लगते गये
दूर खड़ा तमाशा-ए-नसीब देखते रहे हम

 

 

 

1. जुदाई का दुख 2. सुबह

 

 

 

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