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july2015
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कलयुग का सुख--- सुशील शर्मा

 

सोहनी ने दीपावली की रात को टोटका कर कुछ सिन्दूर अपनी पड़ोसन मोहनी के घर डाला सोचा उसकी कुछ परेशानी कम हो जायेगी।
रात को लक्ष्मी जी भ्रमण को निकली सोहनी की हरकत देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ। लक्ष्मी जी सोचने लगीं दिन में तो इन दोनों के बीच बहुत मधुर व्यवहार रहता है लेकिन रात के अँधेरे में ये कैसा गलत व्यवहार?
लक्ष्मी जी ने सोहनी की परीक्षा लेनी चाही रात को उन्होंने सोहनी को स्वप्न में में दर्शन दिए ।उन्होंने सोहनी से कहा *" बोलो सोहनी तुम्हे क्या चाहिए ?"*
सोहनी ने कहा *"मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आप मोहनी को बहुत सारे दुःख देदो।"*
लक्ष्मी जी ने कहा *"उसे दुखी क्यों देखना चाहती हो?"*
सोहनी ने कहा *"लक्ष्मीजी ये कलयुग है आपको नहीं मालूम कलयुग में इंसान सिर्फ दूसरे विशेष कर अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के दुःख देख कर ही सुखी होता है।और कोई चीज उसे इतना सुख नहीं दे सकती।"*
लक्ष्मी जी सोहनी के जबाब से अभी तक सदमे मे है।

 

 

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