हिसाब–डा. नन्द लाल भारती

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एक तरफ मृत शरीर दूसरी तरफ गांव के बड़े बुजुर्ग लाश को लेकर चिंतित थे। दोनों बेटे विपरीत दिशाओं में मुह फेरे बैठे हुए लाश से बेखबर जो कल मां थी ।बड़ा बेटा कण्डा छोटा बेटा अगरबत्ती सुलगाकर मां के अन्तिम संस्कार की कवायद पूरी कर चुके थे बाकी गांव वाले चंदा इकट्ठा कर पूरी करने के इंतजाम में  थे ।साल भर पहले तो वकील साहब मरे थे।वकील साहब के मरते धनमति दो बेटा बहू के होते हुए भी लावारिस हो गई थी ।दो दिन पहले अम्मा को पानी से रोटी गीली करते हुए हमने देखा था पड़ोस की नवविवाहिता सुभौती आंख मसलते हुए बोली ।बताई क्यों नहीं अपनी सास को तो बता सकती थी दामीबाबा  बोले ।कैसे कसम तोड़ती सुभौती बोली बाबा ?भूख से मर गई पर परिवार की इज्ज़त बचाते बचाते। हे भगवान  इन  नालायकों जैसी औलाद किसी को नहीं देना ।गांव वालों ने धनमति के मौत की खबर उसके मायके पहुंचा कर  मणिकर्णिका  ले जाने का इंतजाम कर लिया।धनमति के भाई गिरिराज के आते ही शव यात्रा मर्णिकर्णिका को प्रस्थान कर गयी।दाह संस्कार से लौटने के तुरंत बाद गिरिराज ने सभी के पाई पाई हिसाब चुका दिया ।धनमति के दोनों बेटे चन्दर और मन्दर कण्डे और  अगरबत्ती के खर्चे के हिसाब को लेकर  आमने-सामने थे। उनकी पत्नियां धनमति के छोड़े सामान पर अपना कब्जा ठोंक रही थी।यह सब देखकर सुभौती बोली हे भगवान ऐसे ही बेटा बहू होते है तो मुझे ही नहीं मेरे दुश्मनों को भी नहीं देना ।डां नन्द लाल भारती

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