स्पर्श—भानुप्रताप कुंजाम’अंशु’

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मयूर बन

नाचता है

मन

खिल उठता है

अंग अंग

सक्रिय हो जाती है

प्रत्येक कोशिका

निश्च्छल ,निर्मल

निस्वार्थ

प्रेम बरसता है

उस वक्त

बेसुमार

मां के

गोद सा

सुकुन देता है

जब होता है

प्राणप्रिया से

स्पर्श.

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