आशियाना—मदन मोहन सक्सेना

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बिन आस के दुनियाँ में जीने में क्या रक्खा है
दिल में दिलबर के लिए आशियाना बना रक्खा है
उसके प्यार और चाहत ने मुझे दीवाना बना रक्खा है
कहीं अकेला न रह जाहूं मैं जनाजा सजा रक्खा है

प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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