गाल पर लालिमा बिछी जाये—डा मधु त्रिवेदी

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गाल पर लालिमा बिछी जाये
नैन में शर्म की नमी जाये

फूल हर भाँति के सजाए है
बोल किससे सिंगार की जाये

दोष देते सभी बहूँओं को
सास कों सी कही भली जाये

नौजवां कामचोर होगें जब
दालरोटी सदा कमी जाये

काम अच्छा करे न सरकारें
खूब उनको कही खरी जाये

यत्न जब आदमी करेगा तब
वक्त पर चाँदनी मिली जाये

देश मेरा महान होगा तब
मुफलिसी दूर हो मिटी जाये

डा मधु त्रिवेदी

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