प्रेम ,मिलन ,वियोग ,स्मृति ——- सुशील शर्मा

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चातक प्रेम
आसन्न इन्तजार
स्वाति की बूँद।

तुम्हारा प्रेम
उजालों से भरा मैं
जलता दीया।

प्रेम का अर्थ
खुद को खो देना है
उसे पाकर।

प्रेम से बुना
बिखरा हुआ स्वप्न
स्मृति के धागे।

समस्त सृष्टि
प्रेम बना आधार
बांधे संसार।

सहज श्रद्धा
आध्यात्मिक मिलन
वर्तुल ऊर्जा।

प्रेम डगर
मिलन बिछुड़न
अतृप्त मन।

मिलन रात
मेंहदी रचे हाथ
आँखों से बात।

आद्र नयन
वियोग का विषाद
पिया की याद

रूठा बसंत
निष्ठुर बने कंत
दर्द अनंत।

तुम्हारी स्मृति
पीत अमलतास
झरते फूल।

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