पर्यावरण पर दोहे— सुशील शर्मा

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(1 )
नदियां मुझ से कर रहीं, चुभता एक सवाल।
कहाँ गया पर्यावरण ,जीना हुआ मुहाल।
(2 )
तान कुल्हाड़ी है खड़ा ,मानव जंगलखोर।
मिटा रहा पर्यावरण ,चोर मचाये शोर।
(3 )
बादल से पूछो जरा ,पानी की औकात।
बूंद बूंद पर लिखी है ,पर्यावरणी बात।
(4 )
पर्यावरण मिटा रहे ,रेतासुर कंगाल।
सिसक सिसक नदिया करे ,सबसे यही सवाल।
(5 )
कूड़ा करकट फेंकते ,नदियों में सामान।
फिर बांटे सब ओर हम ,पर्यावरणी ज्ञान।
(6 )
पर्यावरण पर लिखना ,मुझको एक निबंध।
सांसे एक दिन बिकेंगी ,करलो सभी प्रबंध।
(7 )
हिमखंडों का पिघलना ,और सूरज का ताप ।
पर्यावरण मिटा रहा ,मानव करके पाप।
(8 )
दूषित पर्यावरण से ,रोग हज़ारों होंय।
तन मन धन सब मिटत है ,चैन ख़ुशी सब खोंय।
(9 )
गौरैया दिखती नहीं ,गलगल है अब दूर।
पर्यावरणी साँझ में ,पंछी सब बेनूर।
(11 )
जंगल पर आरी चले ,पर्यावरणी घात।
रिश्ते सब मरते हुए ,चिंता है दिन रात।
(12 )
ग्रीष्म ,शरद ,बरसात हैं ,जीवन के आधार।
स्वच्छ रहे पर्यावरण ,ऐसे रखो विचार।
(13 )
हरियाली के गीत में ,प्यार भरा पैगाम।
पर्यावरण सुधारिये ,स्वस्थ रहो सुखधाम।
(14 )
ओज़ोन क्षरण से हुआ ,तापमान अतितप्त।
दूषित है पर्यावरण ,जीवन है अभिशप्त।
(15 )
वृक्ष हमारे मित्र हैं ,वृक्ष हमारी जान।
वृक्षों की रक्षा बने ,पर्यावरणी शान।
(16 )
काट दिए जंगल सभी ,कांक्रीट हर छोर।
दूषित कर पर्यावरण ,हम विकास की ओर।
(17 )
वृक्षारोपण कर करें ,उत्सव की शुरुआत।
पर्यावरण की सुरक्षा ,सबसे पहली बात।
(18 )
हरे वृक्ष जो काटते ,उनको है धिक्कार।
पर्यावरण बिगाड़ते ,वो सब हैं मक्कार।
(19 )
जंगल के रक्षक बनो ,करके ये संकल्प।
हरी भरी अपनी धरा ,पर्यावरण प्रकल्प।
(20 )
वायु अब बदहाल है ,पर्यावरण विनिष्ट।
दुष्ट प्रदुषण हंस रहा ,दे ना ना से कष्ट।
(21 )
प्राणवायु देकर हमें ,वृक्ष बचाएं जान।
पर्यावरण सुधारते ,जैवविविधता मान।
(22 )
धरती बंजर हो गयी ,बादल गए विदेश।
पर्यावरण बिगाड़ कर ,लड़ते सारे देश।
(23 )
प्यासे पनघट लग रहे ,प्यासे सारे खेत।
पर्यावरण विभीषिका ,लूटी सारी रेत।
(24 )
सदियां सजा भुगत रहीं ,निज स्वार्थों को साध।
पर्यावरण विनिष्ट है ,है किसका अपराध।
(25 )
जल ही जीवन है सदा ,जल पर वाद विवाद।
पर्यावरण विषाक्त है ,पीढ़ी है बर्बाद।
(26 )
मानव स्वार्थो से घिरा ,बेचें सारे घाट।
पर्यावरण निगल गया ,नदी ताल को पाट।
(27 )
पृथ्वी माता जगत की ,हम सब हैं संतान।
पर्यावरण सवांरिये ,दे इसको सम्मान।
(28 )
जल ,वायु ,पर्यावरण ,वृक्ष ,जीव ,इंसान।
पर्यावरण बचाइए ,तभी बचेगी जान।

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