कस्तूरी की तलाश—-प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

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प्रीत की डोरी
मजबूत रखना
उर जोड़ती ।
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मन का मृग
ईश्वर की तलाश
कस्तूरी चाँद ।
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साँसों में हिन्दी
मिट्टी की है सौरभ
गौरव हिन्दी ।
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स्वयं को तोल ।
तराज़ू बताएगा
सच का मोल ।
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चली कुल्हाड़ी
ठूँठ पे बैठी पाखी
देती गवाही ।
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मृग नादान
कस्तूरी की तलाश
गँवाया प्राण ।
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