उधार की जिंदगी–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

उधार की जिंदगी–डॉ० श्रीमती तारा सिंह   बदनसीब तो तू पहले ही था; बचपन में माँ को खोया, आज अपना भविष्य खो आया । अब आगे क्या करेगा, कुछ बोलेगा भी, या यूँ ही गूँगा बनकर खड़ा रहेगा ! तेरे Read More …

फ़कीरा — डॉ० श्रीमती तारा सिंह

फ़कीरा — डॉ० श्रीमती तारा सिंह   पहाड़ों की गोद में ,लता-वितानों से ढँका जगुआ का गाँव बड़ा ही मनोरम था । भाँति-भाँति के सुस्वादू फ़ल-फ़ूल वाले वृक्ष, पुष्प-शय्याओं का समारोह,पागल कर देने वाली सुगंध की लहरें, हृदय में चुभने Read More …

कलियुगी राम–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  कलियुगी राम–डॉ० श्रीमती तारा सिंह   वर्षों  से  दिल  में  एक  अरमान  था पल रहा कि, देवघर जाकर, बाबा भोले का दर्शन करूँ । उनके चरणों  में अपनी श्रद्धा –सुमन अर्पित करूँ, लेकिन जिंदगी के भाग-दौड़ ने कभी ऐसा Read More …

लगता है सामने हो और मुस्कुरा रहे हो.—Aakash Wani

April 2 जाने क्यूँ आज रह रह के याद आ रहे हो.., लगता है सामने हो और मुस्कुरा रहे हो..! चुप्पी सी छायी है होठों पर जाने क्यूँ.., खामोश नज़रों से क्यूँ दिल जला रहे हो..! मौसम चल पड़ा है Read More …

छोड़कर जब मुझे जाओगे —संदीप अलबेला

Sandeep Kumar Albela April 1 मेरी नज़रो से नज़रे मिला कर कहो मेरे सर की कसम जरा खा कर कहो हो के मुझसे जुदा कैसे रह पाओगे . छोड़कर जब मुझे जाओगे -2 याद मेरी तुम्हें क्या नहीं आयेगी? कसक Read More …

बचपन में एक पार्क में जाते थे झूला झूलने–.विपुल त्रिपाठी

Vipul Tripathi March 7 बचपन में एक पार्क में जाते थे झूला झूलने सबसे मजेदार झूला फिसल पट्टी लगता था एक बार किसी तरह चढ़ जाओ बिना गिरे फिसल अपने आप ही जाओगे बुरी तरह चाहे बीच में कितना भी Read More …

तुझे मैं भुलाऊँ कैसे. —संदीप अलबेला_

Sandeep Kumar Albela May 1 at 7:28am · तू कहता है कि मैं भूल गया तुझको, अपने जज्बात बताऊँ कैसे??? तू जिन्दगी का खूबसूरत हादसा है, तुझे मैं भुलाऊँ कैसे. _संदीप अलबेला_

ऐ जिन्दगी क्या कहूँ तेरी हर अदा पर रोना आया–संदीप अलबेला

Sandeep Kumar Albela May 3 at 6:17am ऐ जिन्दगी क्या कहूँ तेरी हर अदा पर रोना आया, ऐसा नहीं कि तुमने बस सितम ही ढाये हैं मुझ पर, ये भी नहीं कि हर बार खुद के लिए रोया हूं, अपने Read More …

क्यों डरता हूँ तन्हाई से, यहाँ कोई भी नही–Blogger

क्यों डरता हूँ तन्हाई से, यहाँ कोई भी नही खोजता हूँ खुदा को सहारे के लिए, यहाँ तो वो भी नही तन्हाई से घबरा कर बाहर निकल जाता हूँ बाहर भीड़ से घबरा कर तन्हाई में आ जाता हूँ तन्हा Read More …