“ज़िंदा रहने के लिए”—– शबाना के.आरिफ़

Shabana K Aarif 2:42 AM (8 hours ago) to me “ज़िंदा रहने के लिए”   लेखक : शबाना के.आरिफ़ तन्हा हम हुए ज़माने में ये भी करम है ख़ुदा का क्या होता ग़र ज़मीं भी न होती ज़िंदा रहने के लिए शिकस्ता हैं ख़ुद से Read More …

तन्हाई भी रफ़ीक़ है ख़ुद से गुफ्तगू का सिलसिला—-शबाना के. आरिफ़

Shabana K Aarif 3:12 AM (8 hours ago) to me तन्हाई भी रफ़ीक़ है ख़ुद से गुफ्तगू का सिलसिला चलता है शब्-ओ-सहर ख्वाहिशों में खो जाने का सिलसिला चलता है शबाना के. आरिफ़

गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में—सलिल सरोज

सलिल सरोज   गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में तो आज  हुई न होती मुरब्बत ज़माने में ।।1।। गर मशाल थाम ली होती दौरे-वहशत में तो कुछ तो वजन होता तुम्हारे बहाने में ।।2।। जिसकी ग़ज़ल है वही Read More …

जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो—Sanchita Lahiri

Sanchita Lahiri December 15, 2016 जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खुबसूरत हो, अच्छा तो वही इन्सान होता है, जो तब आपके साथ हो जब आपको उसकी जरुरत हो !!

मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत —Sanchita Lahiri

Sanchita Lahiri December 11, 2016 मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत है, राहे जिन्दगी में इम्तेहान आने बहुत है, मत करो गिला उसका जो मिला नहीं, इस दुनिया में खुश रहने के बहाने बहुत है !!

क्या कयामत है,सभी हमीं को बुरा कहते हैं—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  क्या  कयामत है, सभी  हमीं को  बुरा कहते हैं हमारी  नेकी  को  छोड़, बदी  की चर्चा करते हैं   प्रलय  के  दिन  भी, वे  हमारे  विरूद्ध खड़े रहे देखना  है, आगे  वे, और  क्या तमाशा करते हैं   मिटती Read More …

कहते हैं मेरे दोस्त, मेरा सूरते हाल देखकर—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

कहते      हैं     मेरे     दोस्त,   मेरा    सूरते   हाल    देखकर कर  ले  न  ख़ुदा तुझको  याद ,तू  ख़ुदा  को  याद  कर   आदमी  खाक  का  ढ़ेर है, वादे-फ़ना1 कुछ भी नहीं मौत  का  सजदा2 हो, मौत से न कोई फ़रियाद कर   Read More …

उनके दिये जख्म सभी,जब मुस्कुराने लगे—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

उनके   दिये   जख्म   सभी,  जब  मुस्कुराने  लगे तब वे    दूर-दूर   तक    हमको,  नजर    आने  लगे   निगाहें- शौक    सरे- बज्म1  बेपर्दा    हुआ जुल्मते-आश2  मेरी  ओर  कदम  बढ़ाने लगे   पता  नहीं,  इश्क  में  थी  क्या  ऐसी  बात जिसे   भुलाने   में, Read More …

इक तू नहीं साथ,गम सारा मेरे साथ है–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

इक  तू  नहीं  साथ, गम  सारा  मेरे साथ है आज  फ़िर  वही  दिन ,वही  जुल्मते-रात1 है   मौत  रहती  है  , जिंदगी  पर  घात  लगाये हौसला,    मुस्ते-खाक2    का   बेबुनियाद  है   नजर  बंद  कर  देखती  हूँ जब तमशाये-दिल दीखता , Read More …

इक तू नहीं साथ, गम सारा मेरे साथ–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  –डॉ. श्रीमती तारा सिंह इक  तू  नहीं  साथ, गम  सारा  मेरे साथ है आज  फ़िर  वही  दिन ,वही  जुल्मते-रात1 है   मौत  रहती  है  , जिंदगी  पर  घात  लगाये हौसला,    मुस्ते-खाक2    का   बेबुनियाद  है   नजर  बंद  कर  देखती  Read More …