वर्तमान परिवेश/देशद्रोह पर-विनोद कुमार यादव

विनोद ‘निर्भय’ March 1, 2016 वर्तमान परिवेश/देशद्रोह पर …………………………………. आतंकी नायक बना,संसद चाटे धूल उपवन को ही रौंदता,इक अदना सा शूल कैसे-कैसे लोग हैं,दुनियाँ में भगवान बेशर्मीं से कर रहे,देशद्रोह का गान मानवता लाचार है,दवा चले ना जोग सज्जन को Read More …

दिल-ए-नादां—तुषार राज रस्तोगी

Tamashaezindagi September 4, 2016 दिल-ए-नादां ———————————————————— दिल-ए-नादां देखता जा, ज़रा रुक तो सही अभी इश्क़ होगा आबाद, ज़रा रुक तो सही मजनू, महिवाल, फरहाद, सारे मरीज़-ए-इश्क़ आज होंगे सब कामयाब, ज़रा रुक तो सही सजेगी डोली, महफ़िल-ए-हुस्न कद्रदां होंगे ले Read More …

कैद में धूप —- सुशील शर्मा

कैद में धूप सुशील शर्मा अंतर्विरोधों, अंधविश्वासों से ग्रस्त, शोषण पर आधारित तुम्हारा सड़ा गला घृणा से अभिसिंचित तंत्र क्रूर छदम सहानुभूति खलती है तुम्हारी कृत्रिम हंसी निर्धनता, शोषण, बेकारी और असुरक्षा में घिरा गण आखरी छोर पर खड़ा।  निरर्थक, Read More …

पीत अमलतास —-सुशील शर्मा

पीत अमलतास सुशील शर्मा पीत अमलतास नीरव सा क्यों उदास है। सत्य के सन्दर्भ का , चिर परिवर्तित इतिहास है। सर्जना को संजोये , दर्द का संत्रास है। अहं की अभिव्यंजना उपमान मैले हो गए। अनुभूतियाँ निसृत हुईं बिम्ब धुंधले Read More …