आह —डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना

आह —डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना एकभयंकरआग एकदहनएकतपन अंतरजवाला जिसकीदाहमें चमड़ेकीक्याबिसात लोहेकीक्याऔकात भस्महोजाहैअश्म एकअलौकिक, अदृश्यहथियार तीक्ष्ण,…

चूल्हा–डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना-

चूल्हा–डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना-   मैंचूल्हाहूँ सदियोंसेजलरहाहूँ झुलसरहाहूँ लेकिन ‘उफ़’ मेरेशब्दकोशमेंनहींहै सूरजभीमेरीबराबरीनहींकरसकता क्योंकि वहकेवलदिनमेंजलताहै औरमैंदिनरात…

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