काश! मैं होता सांसद–हेमेन्द्र क्षीरसागर

 काश! मैं होता सांसद (हेमेन्द्र क्षीरसागर, पत्रकार, लेखक व विचारक)       काश! मैं होता सांसद यह प्रश्न बार-बार मेरे जेहन में कौंधकर रहा है कि मुझे अब सांसद बनने जनता की अदालत में जाना चाहिए। इसलिए की मेरे सांसद ने मुझे, Read More …

प्यार का गीत—अनिल कुमार

प्यार का गीत मैं तुम बन जाऊँ, तुम मैं बन जाओ मैं तुम को चाहूँ, तुम मुझ को चाहो प्यार में मैं और तुम , हम हो जाएँ इक होकर हम.तुम , प्यार में खो जाएँ फिर मैं न सोचूँ Read More …

गंगा–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

गंगा स्वर्गलोक    के      सूत्र    सदृश भूलोक  को  उससे   मिलाने  वाली चंचल , चमकीली,  मणि   विभूषिता शून्य  के  अनंत  पथ  से  उतरकर धरा,शतदल पर निर्भीक बिचरने वाली पतित पावनी, वंदनी, दुखहारणी, गंगा यह  जान चिंता  से दृष्टि  धुँधली हो गई स्मृति Read More …

श्रीमती डा0 तारा सिंह सम्मानित

क्रमांक 0087               श्री सरस्वती देव्यै नम          स्थापित 2007 प्रथमांक देवसुधा पत्रिका हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर 242401 उ0प्र0   सम्मान पत्र               श्रीमती डा0 तारा सिंह संपादक स्वर्गविभा ई पत्रिका मुंबई भारत को अपनी पत्रिका के संपादन के माध्यम से Read More …

कहते हैं मेरे दोस्त, मेरा सूरते हाल देखकर

कहते      हैं     मेरे     दोस्त,   मेरा    सूरते   हाल    देखकर कर  ले  न  ख़ुदा तुझको  याद ,तू  ख़ुदा  को  याद  कर   आदमी  खाक  का  ढ़ेर है, वादे-फ़ना1 कुछ भी नहीं मौत  का  सजदा2 हो, मौत से न कोई फ़रियाद कर   Read More …

72 वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल बिहारी लाल सम्मानित

72 वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल बिहारी लाल सम्मानित +++++++++++++++++++++++++++++++++ रवि शंकर नई दिल्ली।72 वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारत सरकार के उपक्रम पवन हंस लि. के मुख्यालय नोयडा में झंडोतोलन के बाद एक कवि सम्मेलन का आयोजन Read More …

जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो—Sanchita Lahiri

Sanchita Lahiri December 15, 2016 जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खुबसूरत हो, अच्छा तो वही इन्सान होता है, जो तब आपके साथ हो जब आपको उसकी जरुरत हो !!

“कर्तव्यनिष्ठता” —डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”

Dr. Rajni Agrawal 9:58 AM (7 hours ago) to me “कर्तव्यनिष्ठता” अब ये किसका मोबाइल बजने लगा? तंग आ गई हूँ इन घंटियों के शोर से। बहू देख तो ज़रा …कहते हुए श्यामा ने बूढ़ी हड्डियों को सहारा देते हुए Read More …

कह – मुकरी——–डॉ. रंजना वर्मा

कह – मुकरी —————– अपने मन की नित्य चलावै अवसर पावत मोहिं सतावै सहे न जायें वा के तेवर । का सखि , साजन ? ना सखि , देवर ।।1 —————————- बिन पेंदी लोटा सी डोले सीधे मुख कबहूँ नहिं Read More …