कभी किस्से में मिलती है—अमरेश सिंह भदोरिया

Amresh Singh 1:45 PM (21 hours ago) to me कभी किस्से में मिलती है कभी मिलती  कहानी में। सुखद अहसास-सी है वो महकती   रातरानी     में। करुँ तारीफ़  भी  कितनी भला उसके हुनर  की  मैं, एक मुस्कान से अपनी वो वह लगाती आग Read More …

प्यारी मां—डॉ ० प्रवीण कुमार

[03/06, 16:57] Praveen Kumar: मुक्तक प्यारी मां कहानी सुनाती सुलाते सुलाते बहाना बनाती रिझाते मनाते मां तू है ममता की देवी रिचा की सुनाती है लोरी ह्रदय से लगा के।१। बनाये खिलाये हंसाये रू ला के पढाये सिखाये पुकारे मनाके Read More …

प्यारी मां—-Praveen Kumar

Praveen Kumar 5:14 PM (2 hours ago) to me [03/06, 16:57] Praveen Kumar: मुक्तक प्यारी मां कहानी सुनाती सुलाते सुलाते बहाना बनाती रिझाते  मनाते मां तू है ममता की  देवी  रिचा की सुनाती है लोरी ह्रदय से लगा के।१। बनाये Read More …

आईना—–अमरेश सिंह भदोरिया

_______मुक्तक_______ आईना | | | आईना हूँ इसलिए  सच बोल रहा हूँ। पूरी हक़ीक़त  को  पूरा  तोल रहा हूँ। पड़ जाय  ना   दरार   संबंध  मे कहीं, इसलिए संभल-संभल के बोल रहा हूँ। | | | भूँख | | | मुफ़लिशी Read More …

मन का द्वंद गहन हो जब भी—Sushil Sharma

मुक्तक सुशील मन का द्वंद गहन हो जब भी। जीवन में अंतर्द्वंद हो जब भी। मुझ से आकर तुम मिल लेना। सब दरवाजे बंद हो जब भी। कठिन रास्तों पर है चलना। पग पग पर बैठे हैं छलना। संघर्षों से Read More …

प्यार इश्क मोहब्बत इसका कोई सार नहीं बाबा-चन्द़शेखर मल्ल

(1) प्यार इश्क मोहब्बत इसका कोई सार नहीं बाबा।।।। ये बस दिल के समझौते है प्यार नही बाबा।।। इन आधे अधूरे शब्दों में कोई जज्बात नही बाबा।।। हम भी एक हरजाई को दिल दे बैठे थे पर रहे इंसान नहीं Read More …

ना तुम समझ पाये ,ना मै समझ पाया– chandrashekhar mall

शीर्षक:ना तुम समझ पाये ,ना मै समझ पाया (१) तेरे खामोश से चेहरे से मैं कुछ कह नही पाया बहुत सोचा बहुत समझा पर आगे बढ नही पाया मेरी आंखों ने तेरी आंखों से क्या कहा था तब ना तुम Read More …

सनातन धर्म है अपना ,इसी से आन हमारी है —रवि कलाल

सनातन धर्म है अपना ,इसी से आन हमारी है । मिट न पाये जो किसी से, वही पहचान हमारी है ।। न जाने क्यों भटकता है,आज मेरे देश का युवा विवेकानंद से  युवा,तभी तो शान हमारी है ।। रचनाकार:-रवि कलाल

लिपट आऊँ तिरंगे में ,यहीँ अरमान दिल में है—-रवि कलाल

लिपट आऊँ तिरंगे में ,यहीँ अरमान दिल में है। भगत सिंह प्रेरणा मेरी,वहीँ बलिदान दिल में है । मेरी ये जान जिससे है और अभिमान जिसपे है, मेरा मेहबूब ,मेरा यार हिंदुस्तान दिल में है ।। रचनाकार ;- रवि कलाल Read More …