प्यार इश्क मोहब्बत इसका कोई सार नहीं बाबा-चन्द़शेखर मल्ल

(1) प्यार इश्क मोहब्बत इसका कोई सार नहीं बाबा।।।। ये बस दिल के समझौते है प्यार नही बाबा।।। इन आधे अधूरे शब्दों में कोई जज्बात नही बाबा।।। हम भी एक हरजाई को दिल दे बैठे थे पर रहे इंसान नहीं Read More …

ना तुम समझ पाये ,ना मै समझ पाया– chandrashekhar mall

शीर्षक:ना तुम समझ पाये ,ना मै समझ पाया (१) तेरे खामोश से चेहरे से मैं कुछ कह नही पाया बहुत सोचा बहुत समझा पर आगे बढ नही पाया मेरी आंखों ने तेरी आंखों से क्या कहा था तब ना तुम Read More …

सनातन धर्म है अपना ,इसी से आन हमारी है —रवि कलाल

सनातन धर्म है अपना ,इसी से आन हमारी है । मिट न पाये जो किसी से, वही पहचान हमारी है ।। न जाने क्यों भटकता है,आज मेरे देश का युवा विवेकानंद से  युवा,तभी तो शान हमारी है ।। रचनाकार:-रवि कलाल

लिपट आऊँ तिरंगे में ,यहीँ अरमान दिल में है—-रवि कलाल

लिपट आऊँ तिरंगे में ,यहीँ अरमान दिल में है। भगत सिंह प्रेरणा मेरी,वहीँ बलिदान दिल में है । मेरी ये जान जिससे है और अभिमान जिसपे है, मेरा मेहबूब ,मेरा यार हिंदुस्तान दिल में है ।। रचनाकार ;- रवि कलाल Read More …

सहज समर्पण’–इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’ 19 hrs · Allowed on Timeline     ‘सहज समर्पण’ (मुक्तक)छल-छंदों ने मारी ठोकर जब भी नाच नचाया है. सहज बचाकर गोद उठाकर ले उर कंठ लगाया है. कर्ता-कर्म तुम्ही हो कारक ध्येय हमारे लक्ष्य तुम्हीं, Read More …

मेरे कदमोँ की आहट को सदा पहचान जाती–सागर यादव ‘जख्मी’

1. मेरे कदमोँ की आहट को सदा पहचान जाती है वो गहरी नीँद मेँ होती भी है तो जाग जाती है मेरी गजलेँ मेरे मुक्तक उसी माँ  को समर्पित हैँ कि जिसके त्याग के आगे ये दुनिया हार जाती है Read More …

मिली जो भी खबर मुझको तुम्हेँ–सागर यादव ‘जख्मी’

मिली जो भी खबर मुझको तुम्हेँ बतला रहा हूँ मै यकीँ मानो उसी विधवा से मिलकर आ रहा हूँ मै न देवोँ की कृपा मुझ पर न तेरा ही सहारा है ये मेरे माँ की महिमा है कि गजलेँ गा Read More …