पहाड़ी कबता °सुधरा कनै सुधारा°—……सुषमा देवी

पहाड़ी कबता °सुधरा कनै सुधारा° अप्पु सुधरा कनै औरनां सुधारा अपणे धर्म रा मत वणा अखाड़ा मत वणनां देया धर्म कमाणे रा जरीया खरे- खरे माह्णुओं कम्म कमा बाबे ,गुरू वणी जेड़े, वणेओ धर्म रे ठेकेदार कमाई तांई जेड़े धर्म Read More …

“ये जीवन है” —शबाना के. अर्रिफ़

Shabana K Aarif 9:33 PM (14 hours ago) “ये जीवन है” लेखक : शबाना के. अर्रिफ़ ये जीवन है असाधारण नहीं होता जी लेना किसी के प्यार में उसका हो कर जी लेना उसके दिल के टुकड़ों को अपना लेना जीवन Read More …

जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो—Sanchita Lahiri

Sanchita Lahiri December 15, 2016 जरुरी नहीं की इन्सान प्यार की मूरत हो, सुंदर और बेहद खुबसूरत हो, अच्छा तो वही इन्सान होता है, जो तब आपके साथ हो जब आपको उसकी जरुरत हो !!

मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत —Sanchita Lahiri

Sanchita Lahiri December 11, 2016 मंजिले बहुत है अफ़साने बहुत है, राहे जिन्दगी में इम्तेहान आने बहुत है, मत करो गिला उसका जो मिला नहीं, इस दुनिया में खुश रहने के बहाने बहुत है !!

“कोई अब तक बना नहीं मेरा—-अनुराग ‘अतुल’

अनुराग ‘अतुल’ April 8 · Edited · “कोई अब तक बना नहीं मेरा। जिन्दगी का पता, नहीं मेरा।। तुम्हें जाना जिधर, उधर जाओ, खुलेगा मयकदा नहीं मेरा । प्रेम का मैं हूँ पुजारी लेकिन, जिस्म से वास्ता नहीं मेरा। हमसफर Read More …

सत्य का संधान दो —माँ सुशील शर्मा

Sushil Sharma 5:44 PM (17 hours ago) to me सत्य का संधान दो माँ सुशील शर्मा ज्ञान दो वरदान दो माँ। सत्य का संधान दो। कुटिल चालें चल रही हैं। पाप पाशविक वृतियां। प्रेम के पौधे उखाड़ें । घृणा पोषक Read More …

गर तुम खुदा होते —सुशील शर्मा

गर तुम खुदा होते सुशील शर्मा गर तुम खुदा होते। तो न यूँ हमसे जुदा होते। हमारे दिल में सदा बहते। न मंदिर न मस्जिद में तुम रहते। ये बुतशिकनी का इल्जामे मंजर है। हज़ारों खुदा बैठे हमारे अंदर हैं। Read More …

अमृत जान उसे पीती हूँ — डॉ. श्रीमती तारा सिंह

                      अमृत जान उसे पीती हूँ  — डॉ. श्रीमती तारा सिंह      दर्शन    की  लहरें, और  मत  अधिक  उछाल और   सच -सच  बता ,  किसने  कहा  तुझसे मेरी जुवां थकती नहीं,अपनी पीड़ा कहने से मैं  मौत  से  डरती Read More …

एक कवि की मृत्यु—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  एक कवि की मृत्यु—डॉ. श्रीमती तारा सिंह    आज  सुबह अखबार में एक खबर पढ़ा मृत्ति  और  आकाश  को  जोड़नेवाला एक  कवि  अपने  जीवन- अरमान की गठरी को धरा पर छोड़,खुद पंचभूत की रचना  में एक तत्व बनकर रमण Read More …

क्या दूँ, क्या है मेरे पास—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  क्या दूँ, क्या है मेरे पास—डॉ. श्रीमती तारा सिंह    मेरी  अनिद्र   आँखों  में  तुम अपनी   आँखें   डालकर  देखो और  बताओ , क्या है मेरे पास दिन की उदासी,रात का जलाहार आँसुओं  में बहे, असफ़ल जीवन को बचाने का Read More …