भैया का आँगन—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

भैया का आँगन—डॉ. श्रीमती तारा सिंह   भैया का आँगन   हाड़-मांस  कंपा  देने  वाली  पौष  की  ठिठुरती रात में,रोज की तरह आज भी बुधना अपने छोटे-छोटे बच्चों को ,एक कोने में छाती से चिपकाये, सिकुड़ा-सिमटा सुबह का इंतजार कर Read More …

रिसते जख्म—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  रिसते जख्म—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह रिसते जख्म            वषंत के प्रात:काल में तालाब के किनारे मंद-मंद मुस्कुरा रहे फ़ूलों को देखकर , शंकर भावुक को उठा, और अपने मित्र शम्भू से कहा—- शम्भू ! देखो, इन फ़ूलों को । Read More …

भैया का आँगन—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  भैया का आँगन—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह   हाड़-मांस  कंपा  देने  वाली  पौष  की  ठिठुरती रात में,रोज की तरह आज भी बुधना अपने छोटे-छोटे बच्चों को ,एक कोने में छाती से चिपकाये, सिकुड़ा-सिमटा सुबह का इंतजार कर रहा था, तभी Read More …

सौ में से एक गया, बचा शून्य—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

 सौ में से एक गया, बचा शून्य—डॉ. श्रीमती तारा सिंह जिसके चरण-स्पर्श से, भविष्य पर कलंक और तकदीर पर ताले पड़ जायें, ऐसे मनहूस को क्यों चरण-स्पर्श करना । बहुत हुआ, अब तुम कल से बालदेव गुरुजी के पास पढ़ने Read More …

रिश्ते तूत के—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  रिश्ते तूत के—डॉ. श्रीमती तारा सिंह               जवानी के दिनों में चारो ओर से आदमी से घिरा रहनेवाला, इंजीनियर बेटा का पिता बैजू, जिंदगी के अंतिम ढ़लान पर मिट्टी के दालान घर में, अपनी घोर दरिद्रता के साथ Read More …

कुर्बानी का पुरस्कार —डॉ० श्रीमती तारा सिंह

कुर्बानी का पुरस्कार —डॉ० श्रीमती तारा सिंह   जीवन सुख से विरत , रामलाल की जिंदगी में शायद ही कोई दिन ऐसा आया होगा, जब वह अपने गाँव के मंदिर में जाकर बाबा भोले के दर्शन किये बगैर घर लौटा Read More …

मधुवा की माँ—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

मधुवा की माँ—डॉ. श्रीमती तारा सिंह   एक लम्बे अरसे के बाद, बीरजू और दीपक, दोनों जब शहर से गाँव लौटे । अपनी पूर्व यादों की मनोवेदना के निर्जन कानन में भटकते हुए कजरी के घर जा पहुँचे, हालाँकि पाँव Read More …

संतान सुख—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  संतान सुख—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह   रामदास और उसकी पत्नी, मैना दोनों ही 60 के ऊपर हो चले थे ,मगर चमड़ी पर झुर्रियाँ अभी तक नहीं आई थीं, न ही बिच्छू के डंक की तरह दीखनेवाली रामदास की मूँछें Read More …

पुत्रमोह—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

पुत्रमोह—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह देवना के पिता सुखेश्वर लाल के , नशे की बात का पूछना ही क्या ? दिन चढ़े तक सोता रहता है और जब नींद खुलती है ,तब धरती पर लोट रही बोतल को लात मारकर कहता Read More …

जैसा कर्म वैसा फल——संदीप कुमार नर

संदीप कुमार नर (बलाचौर पंजाब) कहानी Inbox x sandeep kumar 6:05 PM (1 hour ago) to me जैसा कर्म वैसा फल कुछ लोग कहते है की हर आदमी का जन्म- जन्म का संबंध अपने कर्म से होता है । एक Read More …