कोल्हू का बैल—– –डाॅ0 रामदीन त्यागी

कोल्हू  का बैल- –डाॅ0 रामदीन त्यागी   हमारे देश में कोल्हू में तेल निकालने के लिए बैल को गोल-गोल घुमाया जाता है। बैल के गले पर जुआ होता है। जुए का एक सिरा आगे बढ़ा होता है। उसके एक छोर पर Read More …

निशा—-डॉ० श्रीमती तारा सिंह

निशा—-डॉ० श्रीमती तारा सिंह   वही गोधूलि वेला और वही साहिबा झील, जहाँ रोशनी के साथ बैठकर, देवव्रत जब अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना करता था, जिंदगी उसकी वनलता की तरह खिल उठती थी । उदास भाल, सौभाग्य चिन्ह की Read More …

फ़कीरा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

फ़कीरा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह   पहाड़ों की गोद में ,लता-वितानों से ढँका जगुआ का गाँव बड़ा ही मनोरम था । भाँति-भाँति के सुस्वादू फ़ल-फ़ूल वाले वृक्ष, पुष्प-शय्याओं का समारोह,पागल कर देने वाली सुगंध की लहरें, हृदय में चुभने वाली तरह-तरह Read More …

“दीपावली”—डॉ० श्रीमती तारा सिंह

“दीपावली”—डॉ० श्रीमती तारा सिंह   मेरे मकान के ठीक सामने,जिस विशालकाय खंडहर को लोग आज भूत-बंगला के नाम से जानते हैं, कभी वहाँ भरा-पूरा एक सिंहली परिवार रहा करते थे । ईश्वर ही जाने, उनके पास इतने पैसे कहाँ से Read More …

कोल्हू का बैल- –डाॅ0 रामदीन त्यागी

कोल्हू  का बैल- –डाॅ0 रामदीन त्यागी   हमारे देश में कोल्हू में तेल निकालने के लिए बैल को गोल-गोल घुमाया जाता है। बैल के गले पर जुआ होता है। जुए का एक सिरा आगे बढ़ा होता है। उसके एक छोर पर Read More …

सुबह के पटाखे—- मो0 शफ़ीक़ अशरफ

सुबह के पटाखे टीवी पर संदेश आ रहा था, दिवाली पर पटाखे कम जलाएँ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ ही ध्वनि-प्रदूषण भी, पटाखों की तेज़ आवाज़ से बच्चे-बूढ़े, पशु-पक्षी सब परेशान हो रहे हैं, ऑफिस जाने का समय हो रहा था जल्दी Read More …

अकेलापन—Blogger

[कथा सागर] अकेलापन Blogger <no-reply@blogger.com> Tue, Sep 19, 2017 at 10:14 AM To: swargvibha@gmail.com सुबह के सात बजे सुरिंदर कमरे में समाचारपत्र पढ़ रहे थे उनके पुत्र ने एक वर्षीय पौत्र को सुरिंदर की गोद मे दिया। “चलो दादू को Read More …

भूत कहां—Blogger

भूत कहां Blogger <no-reply@blogger.com> Mon, Sep 18, 2017 at 8:23 PM To: swargvibha@gmail.com प्रोजेक्ट को तय सीमा में सम्पन्न करने के कारण ऑफिस से निकलने में अक्सर देरी होने लगी। सस्ते किराये के कारण रिहाईश नगर सीमा पर बन रहे  Read More …

कल की सावधानी—अमीत कुमार ‘राजन’

कल की सावधानी   रंजु कोचिंग जा रही थी, वह जैसे ही गली में पहुँची तभी उसे एहसास हुआ कि उसके पीछे कोई आ रहा है। वह पीछे मुड़कर देखी तो उसके मुहल्ले का लड़का बिरेन्द्र लपकता हुआ आ रहा Read More …

लक्ष्मण रेखा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

लक्ष्मण रेखा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह मिट्टी के दालान में बैठा, जीवतराम अपनी पत्नी के साथ रहस्यालाप आरम्भ ही किया था कि उसका छोटा बेटा, भिखना चिल्लाता हुआ आया — ’बाबू, बाबू ! बथान पर खूँटे से बँधा जो गाय का Read More …