ध्वनि प्रदूषण—-Blogger

   —- Manmohan Bhatia ( Blogger ) कुफरी से शिमला आते हुए टैक्सी खराब हो गई। कुछ देर तक ड्राइवर टैक्सी दुरुस्त करने की कोशिश की परंतु असफल रहा। “शिमला कितनी दूर होगा?” राहुल ने पूछा। “कोई दस किलोमीटर साहब Read More …

बपौती ——- मँजु शर्मा

बपौती                          सुबह नाश्ते के साथ चाय की ट्रे लेकर अनु पति सुमित के पास आ कर बैठ गयी और अखबार पढ़ रहे सुमित से आक्रोशि स्वर में बोली – ” कल पड़ौस वाली गुप्ता भाभी बता रही थी भाई Read More …

फायदा — — मँजु शर्मा (हलवारा )

फायदा                     रविवार को सुबह के आठ ही बजे थे ,देव ने पत्नी को आवाज लगाकर कहा –          ” अन्नू ! आज मेरे लिए एक पराठा ज्यादा बनाकर ले आओ ” छुट्टी वाले दिन हमेशा देर से उठने वाले Read More …

सुकून का एहसास — मँजु शर्मा (हलवारा )

सुकून का एहसास                         मधुरा के एन.सी.सी.कैम्प में आठ दिन बहुत मजे से सुबह सवेरे उठना ,दौड़ लगाना , परेड के हिस्सों के विभिन्न अभ्यास करते हुए गुजर गए। नौवें दिन सुबह की रोल काल ( हाजिरी लेने का समय ) Read More …

विकल्पहीन रक्त — मँजु शर्मा (हलवारा )

लघुकथा — विकल्पहीन रक्त                 मृणाल की गर्भावस्था को नौ महीने पूरे हो गए थे। उसे अस्पताल के लेबर रूम में गए चार घंटे हो गए थे। लेबर रुम से नर्स बाहर आयी और मृणाल के पति विवेक को बताने Read More …

सरिता – अंकुश्री

सरिता- अंकुश्री अंकुश्री प्रेस काॅलोनी, सिदरौल, नामकुम, रांची-834 010 मो0 8809972549 म्.उंपस रू ंदानेीतममीपदकपूतपजमत/हउंपसण्बवउ   (कहानी) सरिता – अंकुश्री सरिता ससुराल पहुंची तो ससुराल वाले उसके सामानों के आसपास आकर जमा हो गये. जब उसने बक्सा खोला तो परिवार के Read More …

अति प्रश्नों से बचें——प्रभा पारीक

प्रस्तुत कथा ’’ उपनिषद की कहानियां ’’ भारतीय साहित्य निधि द्वारा प्रस्तुत पुस्तक से ली गयी हैं अति प्रश्नों से बचें यह उस समय की बात हैं जब सोचने के काम में जुटने वाले नव चिन्तको के लिये सोचने का Read More …

कोल्हू का बैल—– –डाॅ0 रामदीन त्यागी

कोल्हू  का बैल- –डाॅ0 रामदीन त्यागी   हमारे देश में कोल्हू में तेल निकालने के लिए बैल को गोल-गोल घुमाया जाता है। बैल के गले पर जुआ होता है। जुए का एक सिरा आगे बढ़ा होता है। उसके एक छोर पर Read More …

निशा—-डॉ० श्रीमती तारा सिंह

निशा—-डॉ० श्रीमती तारा सिंह   वही गोधूलि वेला और वही साहिबा झील, जहाँ रोशनी के साथ बैठकर, देवव्रत जब अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना करता था, जिंदगी उसकी वनलता की तरह खिल उठती थी । उदास भाल, सौभाग्य चिन्ह की Read More …

फ़कीरा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

फ़कीरा–डॉ० श्रीमती तारा सिंह   पहाड़ों की गोद में ,लता-वितानों से ढँका जगुआ का गाँव बड़ा ही मनोरम था । भाँति-भाँति के सुस्वादू फ़ल-फ़ूल वाले वृक्ष, पुष्प-शय्याओं का समारोह,पागल कर देने वाली सुगंध की लहरें, हृदय में चुभने वाली तरह-तरह Read More …