जैसा कर्म वैसा फल——संदीप कुमार नर

संदीप कुमार नर (बलाचौर पंजाब) कहानी Inbox x sandeep kumar 6:05 PM (1 hour ago) to me जैसा कर्म वैसा फल कुछ लोग कहते है की हर आदमी का जन्म- जन्म का संबंध अपने कर्म से होता है । एक Read More …

आनजानी भूल ऐकल्लता भाग -।।—- संदीप कुमार नर

  आनजानी भूल   ऐकल्लता भाग -।। छोटे-छोटे पर्वत एक तरफ जंगल इलाका एक तरफ मैदानी इलाका दूर से देखने में ऐसा प्रतीत होता है।जैसे किसी देवता ने इस गांव को बनाया हो। 25 से 30 मुसलमानों और सिक्ख रहते Read More …

लघुकथा :इज्जतघर—डां नन्द लाल भारती

Nandlal Bharati 4:43 PM (19 hours ago) to me लघुकथा :इज्जतघर बधाई हो रोशनी बीटिया। कैसी बधाई मम्मी।अभी तो रिजल्ट ही नहीं आया। बीटिया बी.ए.का रिजल्ट नहीं आया, आ जायेगा, तुम अच्छे नम्बर से पास हो जाओगी। विश्वास है, कभी Read More …

संतान सुख—–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

संतान सुख—–डॉ. श्रीमती तारा सिंह    रामदास और उसकी पत्नी, मैना दोनों ही 60 के ऊपर हो चले थे ,मगर चमड़ी पर झुर्रियाँ अभी तक नहीं आई थीं, न ही बिच्छू के डंक की तरह दीखनेवाली रामदास की मूँछें पूरी Read More …

रिसते जख्म—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  रिसते जख्म—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह             वषंत के प्रात:काल में तालाब के किनारे मंद-मंद मुस्कुरा रहे फ़ूलों को देखकर , शंकर भावुक को उठा, और अपने मित्र शम्भू से कहा—- शम्भू ! देखो, इन फ़ूलों को । इनका कनक Read More …

पोंगा पंडित—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

पोंगा पंडित—डॉ. श्रीमती तारा सिंह दुहना  गाँव  का  बटोरन  पंडित, जाति  से  कुलीन  ब्राह्मण  थे, पर  एक  गरीब विधवा  से  फ़ंसे  हुए  थे ।  इस  बात  को  पूरा  गाँव  जानता  था , बाबजूद  किसी  में  इतनी  हिम्मत  नहीं  थी  कि Read More …

आज सप्तमी है—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

आज सप्तमी है—डॉ. श्रीमती तारा सिंह आज  दुर्गा  स्थापना  का  छठा  दिन   है, सोचकर  पारो  की  आँखें   भर आईं । उसने  पति  रामपाल  से  कहा— क्या जी , तुम  सो  रहे  हो ? रामपाल , अचम्भित हो पूछा —क्यों, क्या Read More …

“कर्तव्यनिष्ठता” —डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”

Dr. Rajni Agrawal 9:58 AM (7 hours ago) to me “कर्तव्यनिष्ठता” अब ये किसका मोबाइल बजने लगा? तंग आ गई हूँ इन घंटियों के शोर से। बहू देख तो ज़रा …कहते हुए श्यामा ने बूढ़ी हड्डियों को सहारा देते हुए Read More …

प्रायश्चित—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

प्रायश्चित—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह  नित बसंत के सपने सजोये, जीवन जीने वाले , घनश्याम के घर एक दिन सचमुच बसंत बनकर , उसका प्रपौत्र  (रूपदेव) जनम लिया | उसे गोद में भरते ही ,उसके जोश, बल, दया, साहस , आत्मविश्वास Read More …

शरणार्थी—–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

शरणार्थी—–डॉ. श्रीमती तारा सिंह    पौष का महीना था | सलीम अन्यमनस्क मस्जिद के गुम्बद को निहारता , उसकी आँखों में उसके नैराश्य जीवन की क्रोधाग्नि , किसी सैलाब की तरह डुबो देने ,उसकी ओर बढ़ता चला आ रहा था Read More …