पानी जल नीर —–सुशील शर्मा

हाइकु-87 पानी जल नीर सुशील शर्मा सिर पे घड़ा चिलचिलाती धूप तलाशे पानी। शीतल नीर अमृत सी सिंचित मन की पीर। जल का कल यदि नहीं रक्षित सब निष्फल। उदास चूल्हे नागफनी का दंश सूखता पानी नदी में नाव बैलगाड़ी Read More …

गरमी ,धूप ,लू ,घाम ,ताप— सुशील शर्मा

हाइकु -86 गरमी ,धूप ,लू ,घाम ,ताप सुशील शर्मा तपा अम्बर झुलस रही क्यारी प्यासी है दूब। सुलगा रवि गरमी में झुलसे दूब के पांव। काटते गेहूं लथपथ किसान लू की लहरी। रूप की धूप दहकता यौवन मन की प्यास। Read More …

गर्मी/ग्रीष्म/धूप/तपन/घाम—प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ——————————— हाइकु : गर्मी/ग्रीष्म/धूप/तपन/घाम ~~~~~~~~~~~~~~ 01. करारी धूप कड़कने लगी है री ! गर्मी आई । ☆☆☆ 02. धूप से धरा दरकने लगी है बढ़ी जो ताप । ☆☆☆ 03. सूर्य की आग ग्रीष्म की प्रखरता Read More …

रमे रामे मनोरमे—सुशील शर्मा

*रमे रामे मनोरमे* सुशील शर्मा विनम्रता संस्कार समर्पण स्नेह समाधि के अविरल स्त्रोत राम हैं त्याग तपश्चर्य संस्कृति संस्कारों के संवाहक राम हैं कौशल बुद्धि विवेक साधना के धारक राम हैं न्याय सुशासन नियम यम के पालक राम हैं वीरता Read More …

हाइकु : नदी—-प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ———————————- हाइकु : नदी 01. संघर्ष गीत नदी गुनगुनाती जीना सिखाती । ☆☆☆ 02. भव सरिता मन बना नाविक खे गया नाव । ☆☆☆ 03. नदी बहती छलछल करती गीत सुनाती । ☆☆☆ 04. नदी जो Read More …

हाइकु : निर्झर—प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ———————————- हाइकु : निर्झर 01. गिरि को चीर निकलता निर्झर बहता नीर । ☆☆☆ 02. शब्द समर झर.. झर.. झरते भाव निर्झर । ☆☆☆ 03. मन व्यथित भाव निर्झर हुए निकली पीर । ☆☆☆ 04. बहता Read More …

कूप/कुआँ/बावड़ी, ताल/तालाब/पोखर—प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ——————————— हाइकु : कूप/कुआँ/बावड़ी, ताल/तालाब/पोखर 01.बड़ा सवाल क्यों सूख गये कुएं क्यों खोये ताल ? ☆☆☆ 02.कुएं में बाल्टी जब जब झुकती भर के आती । ☆☆☆ 03. बूढ़ा तालाब रो रो कर सुनाता गाँव का Read More …

नव वर्ष हाइकु–प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ——————————— नव वर्ष हाइकु 01. वर्ष नवल पूरण हों सभी के शुभ संकल्प । 02. नवीन वर्ष पग पग में मिले सदा उत्कर्ष । 03. ओस नवल नव वर्ष का करे भोर स्वागत । 04. नया Read More …