हाइकु-122, ठंड—- सुशील शर्मा

हाइकु-122 ठंड धुंधला सूर्य कोहरे की रजाई ओढ़े धरती विद्या मंदिर प्रार्थना भरे स्वर कांपते कंठ ठिठुरी ठंड ठाँव पर ठहरी ठसक भरे। ठंडी चादर ओढ़ कर नदिया नीर निहारे। ओस के मोती दूब की फुनगियां धूप समेटें। तिल के Read More …

हाइकु-121 नववर्ष–Sushil Sharma

हाइकु-121 नववर्ष विदा हो चले वर्ष सत्रह तुम चले अकेले। समेटे तुम कुछ रुसवाईयाँ रूठे से लगे। प्रश्न से तुम उत्तर अनुत्तर कैसे मिलेंगे। विदा के पल आगत है समय सपने बुने। हाइकु-119  है कश्मकश तुझे मैं याद रखूं या Read More …

कातिल तुम /मसीहा भी लगते—सुशील शर्मा

हाइकु-105(सेनेरयु) सुशील शर्मा कातिल तुम मसीहा भी लगते ये मेरे दोस्त। एक खंजर तेरे हाथ में कैसा गले में बांह। मेरे अपने खड़े उस तरफ दुश्मन बन। दिल जो टूटा मुस्काते रहे हम कोई न जाना। मेरा अंतस ईश्वर या Read More …

रूप तुम्हारा—सुशील शर्मा

तांका (जापानी विधा-5757…..77 वर्णक्रम) सुशील शर्मा रूप तुम्हारा बहे नदी सी धारा जीवन सारा महकता सुमन तेरा आँचल जीवन मधुबन तेरी सुगंध मदहोश पवन मादक आंखे जीवन को देतीं अमृत रस मोहक सी बातें वो मुलाकातें प्रेम रस घोलतीं राज Read More …

पानी जल नीर —–सुशील शर्मा

हाइकु-87 पानी जल नीर सुशील शर्मा सिर पे घड़ा चिलचिलाती धूप तलाशे पानी। शीतल नीर अमृत सी सिंचित मन की पीर। जल का कल यदि नहीं रक्षित सब निष्फल। उदास चूल्हे नागफनी का दंश सूखता पानी नदी में नाव बैलगाड़ी Read More …

गरमी ,धूप ,लू ,घाम ,ताप— सुशील शर्मा

हाइकु -86 गरमी ,धूप ,लू ,घाम ,ताप सुशील शर्मा तपा अम्बर झुलस रही क्यारी प्यासी है दूब। सुलगा रवि गरमी में झुलसे दूब के पांव। काटते गेहूं लथपथ किसान लू की लहरी। रूप की धूप दहकता यौवन मन की प्यास। Read More …

गर्मी/ग्रीष्म/धूप/तपन/घाम—प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ——————————— हाइकु : गर्मी/ग्रीष्म/धूप/तपन/घाम ~~~~~~~~~~~~~~ 01. करारी धूप कड़कने लगी है री ! गर्मी आई । ☆☆☆ 02. धूप से धरा दरकने लगी है बढ़ी जो ताप । ☆☆☆ 03. सूर्य की आग ग्रीष्म की प्रखरता Read More …

रमे रामे मनोरमे—सुशील शर्मा

*रमे रामे मनोरमे* सुशील शर्मा विनम्रता संस्कार समर्पण स्नेह समाधि के अविरल स्त्रोत राम हैं त्याग तपश्चर्य संस्कृति संस्कारों के संवाहक राम हैं कौशल बुद्धि विवेक साधना के धारक राम हैं न्याय सुशासन नियम यम के पालक राम हैं वीरता Read More …

हाइकु : नदी—-प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ———————————- हाइकु : नदी 01. संघर्ष गीत नदी गुनगुनाती जीना सिखाती । ☆☆☆ 02. भव सरिता मन बना नाविक खे गया नाव । ☆☆☆ 03. नदी बहती छलछल करती गीत सुनाती । ☆☆☆ 04. नदी जो Read More …

हाइकु : निर्झर—प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

प्रदीप कुमार दाश “दीपक” ———————————- हाइकु : निर्झर 01. गिरि को चीर निकलता निर्झर बहता नीर । ☆☆☆ 02. शब्द समर झर.. झर.. झरते भाव निर्झर । ☆☆☆ 03. मन व्यथित भाव निर्झर हुए निकली पीर । ☆☆☆ 04. बहता Read More …