स्मृति तुम्हारी (नवगीत)– सुशील शर्मा

sushil Sharma 10:38 AM (10 minutes ago) to me स्मृति तुम्हारी नवगीत सुशील शर्मा कसक रही स्मृति तुम्हारी हृदय विरह में जीता है। स्फुट कलियों की मंशा में काटों का काठिन्य मिला। पुलक प्रणय की अभिलाषा में ,विरह नागफन आज Read More …

“कछहुँ करमवा बाकी “–Sukhmangal Singh

प्रकाशनार्थ – “कछहुँ करमवा बाकी “ Inbox x Sukhmangal Singh 6:20 AM (4 hours ago) to me  “कछहुँ करमवा बाकी “————————- डगरी – नगरी ठोकर तारे  भरि – भरि घूसा मारयो री  झाड़ि कलाई  मोहन मारो  कछहुँ करमवा बाकी तारो|  Read More …

“मर्यादा ” —–सुखमंगल सिंह

Sukhmangal Singh 9:46 AM (20 minutes ago) “मर्यादा ” दुर्योधन सा अपने को पट पर न लाओ /भरत भाई बनकर कलयुग में दिखाओ | मान और शान बढे ऐसा कर्तव्य कर जाओ / सुन्दर आशियाना आग ना लगाओ|| जोरू जमीन Read More …

गीत में संचेतना के स्वर हमें दो शारदे !—अनुराग ‘अतुल’

अनुराग ‘अतुल’ गीत में संचेतना के स्वर हमें दो शारदे ! विश्व के नवजागरण का वर हमें दो शारदे! गा उठे कोयल वसन्ती गान जन-मन के विटप पर। बज उठे सत्यम शिवम की धुन धरा पर शुभ्र-भास्वर! छू सकें आकाश Read More …

अंतस के पल (नवगीत ) —–सुशील शर्मा

अंतस के पल (नवगीत ) सुशील शर्मा याद की खुशबू से महके फूल हर सिंगार के। आज भी तो याद होंगे मृदुल पल अभिसार के। अर्थहीन आकारों में संग प्रेम रहित ये अविरल डाह। दीप्त विभव को खो कर क्यों Read More …

सबेरा(बालगीत) —-शशांक मिश्र भारती

सबेरा—-शशांक मिश्र भारती   हुआ सबेरा चिड़िया चहकीं जागो बच्चों और आंखें खोलो निकल स्वप्न लोक से बाहर जल्दी से अपना मुंह धोलो नित्य कर्मों से शीघ्र निपट लो मां से लेकर कुछ खा लो और उठाओ बस्ता अपना जल्दी Read More …

समय( बालगीत) —-शशांक मिश्र भारती

समय                  शशांक मिश्र भारती समय का महत्व समझ लो फिर न लौट कर आएगा जिसने समय व्यर्थ गॅंवाया पीछे से वही पछताएगा सफल न होगा जीवन में न कार्य  पूर्ण कर पायेगा समय का पालन कर ही मंजिल तक Read More …

भज गोविन्दम(गीत) —-सुशील शर्मा

Sushil Sharma 3:27 PM (3 hours ago) to me भज गोविन्दम(गीत) सुशील शर्मा भज गोविन्दम राधे राधे जीवन की नैया को साधे भज गोविन्दम राधे राधे। भज गोविन्दम राधे राधे। जीवन रूप विषम अनुरूपा सुख दुख कष्ट विपत्ति कूपा।। कुछ Read More …

नमामि शम्भो —–सुशील शर्मा

Sushil Sharma Mon, Aug 20, 6:44 PM (16 hours ago) to me नमामि शम्भो सुशील शर्मा शिव लिंगरूप बहिरंग हैं ,नमामि शम्भो। शिव ध्यानरूप अंतरंग हैं ,नमामि शम्भो। शिव तत्व ज्ञान स्वरुप हैं ,नमामि शम्भो। शिव भक्ति के मूर्तरूप हैं Read More …