बड़ी साधना द्वारा मैंने, कुछ गीतों की रचना की थी—गौरव शुक्ल

मेरे इन नीरस गीतों में, यदि तुम अपना स्वर भर देते; सचमुच होती धन्य उसी दिन, मेरी कविता कला निराली। (1) बड़ी साधना द्वारा मैंने, कुछ गीतों की रचना की थी ; अपनी वह प्यारी सी पुस्तक, ज्यों की त्यों Read More …

क्या तुम्हें भी है हमारी याद आती? –गौरव शुक्ल

सच बताना क्या तुम्हें भी है हमारी याद आती? (1) मैं तुम्हारा नाम चातक सा रटा  करता निरंतर,  दु:ख, सुख, पीड़ा, व्यथा में याद हूँ तुमको रहा कर।  एक पल को भी नहीं स्मृति से हमारी, छवि तुम्हारी,  भूल कर Read More …

थाह दिल की जो नापता होगा–डॉ मधु त्रिवेदी

गीतिका ☞☜☞☜ थाह दिल की जो नापता होगा रोज गोता वो मारता होगा देख मौका छुपे चला आता प्रीत का बीज रोपता होगा आज दिलदार जो बना मेरा खूब मुझको वो चाहता होगा बात सारी जो मान ले मेरी मोह Read More …

हनुमत प्रार्थना —-सुशील शर्मा

हनुमत प्रार्थना सुशील शर्मा अखंड प्रचंड प्रतापित हे प्रभु मारुतिनंदन। वीर धीर गंभीर सुवासित हे  कपि कुलवन्दन। राम के काज सम्हालत तुम हे वानर कुलधीश। आगम निगम बखानत तुम को हे शिरोमणि कपीश। रावण दर्प ढहायो लंका आग जलायो हे Read More …

जिसको प्यारे .श्री राम नहीं —अभिवृत अक्षांश

अभिवृत अक्षांश 1 hr · उसे जीवन भर आराम नहीं श्री राम आस्था, राम प्राण हैं मर्यादा का भी प्रभु प्रमाण हैं शरणागत को मित्र-सखा से दुष्ट-हरण को अमोघ बाण हैं भवसागर तरना यदि तुमको प्रभु राम सा कोई नाम Read More …