सबेरा(बालगीत) —-शशांक मिश्र भारती

सबेरा—-शशांक मिश्र भारती   हुआ सबेरा चिड़िया चहकीं जागो बच्चों और आंखें खोलो निकल स्वप्न लोक से बाहर जल्दी से अपना मुंह धोलो नित्य कर्मों से शीघ्र निपट लो मां से लेकर कुछ खा लो और उठाओ बस्ता अपना जल्दी Read More …

समय( बालगीत) —-शशांक मिश्र भारती

समय                  शशांक मिश्र भारती समय का महत्व समझ लो फिर न लौट कर आएगा जिसने समय व्यर्थ गॅंवाया पीछे से वही पछताएगा सफल न होगा जीवन में न कार्य  पूर्ण कर पायेगा समय का पालन कर ही मंजिल तक Read More …

भज गोविन्दम(गीत) —-सुशील शर्मा

Sushil Sharma 3:27 PM (3 hours ago) to me भज गोविन्दम(गीत) सुशील शर्मा भज गोविन्दम राधे राधे जीवन की नैया को साधे भज गोविन्दम राधे राधे। भज गोविन्दम राधे राधे। जीवन रूप विषम अनुरूपा सुख दुख कष्ट विपत्ति कूपा।। कुछ Read More …

नमामि शम्भो —–सुशील शर्मा

Sushil Sharma Mon, Aug 20, 6:44 PM (16 hours ago) to me नमामि शम्भो सुशील शर्मा शिव लिंगरूप बहिरंग हैं ,नमामि शम्भो। शिव ध्यानरूप अंतरंग हैं ,नमामि शम्भो। शिव तत्व ज्ञान स्वरुप हैं ,नमामि शम्भो। शिव भक्ति के मूर्तरूप हैं Read More …

मैं निविड़ तम में नवल आलोक को पाने चला था–गौरव शुक्ल मन्योरा

गीत Gaurav Shukla Manyora 3:49 PM (1 hour ago) to me मैं निविड़ तम में नवल आलोक को पाने चला था। (1) दृष्टि का यह दोष था या अनुभवों की ही कमी थी, या मुझे यह बुद्धि मेरे ही सरल Read More …

मैं आया था द्वार तुम्हारे याचक बन—-गौरव शुक्ल मन्योरा

मैं आया था द्वार तुम्हारे याचक बन, तुमने मेहमानों जैसा सत्कार किया। (1) मेरे विथकित प्राणों को अवलंब मिला, जीवन जीने की आकांक्षा पुनः जगी। मँझधारों में भटक रही मेरी नौका, सही घाट पर जाकर के अंततः लगी। मैं प्रतिमा Read More …

बड़ी साधना द्वारा मैंने, कुछ गीतों की रचना की थी—गौरव शुक्ल

मेरे इन नीरस गीतों में, यदि तुम अपना स्वर भर देते; सचमुच होती धन्य उसी दिन, मेरी कविता कला निराली। (1) बड़ी साधना द्वारा मैंने, कुछ गीतों की रचना की थी ; अपनी वह प्यारी सी पुस्तक, ज्यों की त्यों Read More …

क्या तुम्हें भी है हमारी याद आती? –गौरव शुक्ल

सच बताना क्या तुम्हें भी है हमारी याद आती? (1) मैं तुम्हारा नाम चातक सा रटा  करता निरंतर,  दु:ख, सुख, पीड़ा, व्यथा में याद हूँ तुमको रहा कर।  एक पल को भी नहीं स्मृति से हमारी, छवि तुम्हारी,  भूल कर Read More …

थाह दिल की जो नापता होगा–डॉ मधु त्रिवेदी

गीतिका ☞☜☞☜ थाह दिल की जो नापता होगा रोज गोता वो मारता होगा देख मौका छुपे चला आता प्रीत का बीज रोपता होगा आज दिलदार जो बना मेरा खूब मुझको वो चाहता होगा बात सारी जो मान ले मेरी मोह Read More …

हनुमत प्रार्थना —-सुशील शर्मा

हनुमत प्रार्थना सुशील शर्मा अखंड प्रचंड प्रतापित हे प्रभु मारुतिनंदन। वीर धीर गंभीर सुवासित हे  कपि कुलवन्दन। राम के काज सम्हालत तुम हे वानर कुलधीश। आगम निगम बखानत तुम को हे शिरोमणि कपीश। रावण दर्प ढहायो लंका आग जलायो हे Read More …