“ज़िंदा रहने के लिए”—– शबाना के.आरिफ़

Shabana K Aarif 2:42 AM (8 hours ago) to me “ज़िंदा रहने के लिए”   लेखक : शबाना के.आरिफ़ तन्हा हम हुए ज़माने में ये भी करम है ख़ुदा का क्या होता ग़र ज़मीं भी न होती ज़िंदा रहने के लिए शिकस्ता हैं ख़ुद से Read More …

गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में—सलिल सरोज

सलिल सरोज   गर अपना ही चेहरा देखा होता आईने में तो आज  हुई न होती मुरब्बत ज़माने में ।।1।। गर मशाल थाम ली होती दौरे-वहशत में तो कुछ तो वजन होता तुम्हारे बहाने में ।।2।। जिसकी ग़ज़ल है वही Read More …

क्या कयामत है,सभी हमीं को बुरा कहते हैं—-डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  क्या  कयामत है, सभी  हमीं को  बुरा कहते हैं हमारी  नेकी  को  छोड़, बदी  की चर्चा करते हैं   प्रलय  के  दिन  भी, वे  हमारे  विरूद्ध खड़े रहे देखना  है, आगे  वे, और  क्या तमाशा करते हैं   मिटती Read More …

कहते हैं मेरे दोस्त, मेरा सूरते हाल देखकर—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

कहते      हैं     मेरे     दोस्त,   मेरा    सूरते   हाल    देखकर कर  ले  न  ख़ुदा तुझको  याद ,तू  ख़ुदा  को  याद  कर   आदमी  खाक  का  ढ़ेर है, वादे-फ़ना1 कुछ भी नहीं मौत  का  सजदा2 हो, मौत से न कोई फ़रियाद कर   Read More …

उनके दिये जख्म सभी,जब मुस्कुराने लगे—डॉ. श्रीमती तारा सिंह

उनके   दिये   जख्म   सभी,  जब  मुस्कुराने  लगे तब वे    दूर-दूर   तक    हमको,  नजर    आने  लगे   निगाहें- शौक    सरे- बज्म1  बेपर्दा    हुआ जुल्मते-आश2  मेरी  ओर  कदम  बढ़ाने लगे   पता  नहीं,  इश्क  में  थी  क्या  ऐसी  बात जिसे   भुलाने   में, Read More …

इक तू नहीं साथ,गम सारा मेरे साथ है–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

इक  तू  नहीं  साथ, गम  सारा  मेरे साथ है आज  फ़िर  वही  दिन ,वही  जुल्मते-रात1 है   मौत  रहती  है  , जिंदगी  पर  घात  लगाये हौसला,    मुस्ते-खाक2    का   बेबुनियाद  है   नजर  बंद  कर  देखती  हूँ जब तमशाये-दिल दीखता , Read More …

इक तू नहीं साथ, गम सारा मेरे साथ–डॉ. श्रीमती तारा सिंह

  –डॉ. श्रीमती तारा सिंह इक  तू  नहीं  साथ, गम  सारा  मेरे साथ है आज  फ़िर  वही  दिन ,वही  जुल्मते-रात1 है   मौत  रहती  है  , जिंदगी  पर  घात  लगाये हौसला,    मुस्ते-खाक2    का   बेबुनियाद  है   नजर  बंद  कर  देखती  Read More …

तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया — – विनोद निर्भय

Vinod ‘Nirbhay’ , Gorakhpur 5:45 PM (1 hour ago) to me तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया मुहब्बत  है, मगर  होठों पे लाना  भी नहीं आया कई अवसर  दिए  उसने  तुम्हें इज़हार  करने के, मगर तुमको कोई अवसर Read More …

अगर जो देखो मेरी नज़र से—मंजूषा श्रीवास्तव

Manjusha Srivastava December 20, 2017 12122 121 22 अगर जो देखो मेरी नज़र से | दिखे नज़ारे जवां क़मर से | तुम्हारी नज़रों के आइने में – दिखे हैं लाखों घने भंवर से | बसा लो दिल में ये प्यार Read More …

दादी माँ… – विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

vishwambhar vyagra 2:29 PM (1 hour ago) to me दादी माँ… (ग़ज़ल) माँ  से  भी  अच्छी  भाती   दादी माँ पिटने  से  मुझको  बचाती  दादी माँ मैं  सलौना  था  बचपन में कहती वो काजल-टीका  रोज  लगाती दादी माँ जब आजाता कोई Read More …