ये तेरा कैसा इकरार है——-रघु आर्यन

पूछूँ एक सवाल सभी से, ये तेरा कैसा इकरार है। बांध गले फांसी फंदे से , करे जाति से इजहार है। पैदा हो मिला समाज से, जो दिया गले में डार है। कटते भिड़ते  अपनों से, कैसा जाति से खुमार Read More …

कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत,हम बहुत रोये –डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत,हम बहुत रोये मगर हमारे अश्कों को तुम्हारे दामन का सहारा न मिला   दर्दे-दिल  सुनाता  जाकर किसे , मेरे पाँव के नीचे जमीं तो थी,मगर आसमां पे कोई सितारा न मिला   राहें – Read More …

ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई—डा० श्रीमती तारा सिंह

ऐन   वक्त  पर  बात  बिगड़  गई उस   बेवफ़ा   से  आखें  लड़  गईं   देखा  जो , डूबकर  वीराना था वहाँ पसरा  हुआ, जहाँ  तक  नज़र  गई   पहले  प्यार , फ़िर  इनकार ,  बाद अपने   हर   वादे  से  मुकर  गई Read More …

ऐ हुस्न खुदा, अगर खुदा है–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  ऐ  हुस्न  खुदा, अगर  खुदा है तो   तू  खुदा  से  कम  नहीं   उसमें  है  तीनो  जहाँ का दम तुझमें जमाने का दम कम नहीं   तू  ने ही तो सँभाला है मुझको मेरे  बहके  ये  दो  कदम नहीं Read More …

अब तारे-जमीं लगते नहीं हँसी, हम क्या करें–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

    अब  तारे-जमीं लगते नहीं हँसी, हम क्या करें हर  पल, रुलाती तसवीर तुम्हारी,हम क्या करें   उतरी  है  बहार  गुलशन में,गुल है भरा हुआ हमें  कोई  गुल  लुभाता  नहीं ,हम क्या करें   देखा है जब से तुम्हारी Read More …

घबराहट !!!!!!—-विश्वनाथ शिरढोणकर

Vishwanath Shirdhonkar September 25, 2014 · Indore ·   शुभ प्रभात – चुनाव विशेष – 03 ————————– घबराहट !!!!!! ——————————— एक दूसरे से सहमे है सियासत के चेहरे है ! खूंखार है ,ये भेड़िये है राजनीती के मोहरे है ! Read More …

ऐ ग़म ! तुझे मैं देख ले फिर से मसल कर आ गया — दीपक शर्मा

 दीपक शर्मा   ऐ  ग़म ! तुझे  मैं देख ले फिर से मसल कर आ गया मेरे साथ था बस हौसला तम से निकल कर आ गया। गर  हक़  की  राह चलनी है तो आजा मेरे साथ चल सच सदा Read More …

इस उजड़े गुलशन को जिसने आबाद किया था–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

  इस  उजड़े  गुलशन को जिसने आबाद किया था कहते   हैं   लोग,  उसी   ने  बर्बाद  किया है   गरेबां  की  आग  जब  बुझी, दामन  में लगाया काम जो दुश्मन न किया, दोस्त जल्लाद किया है   जमाने की दरिया में Read More …

आपको मेरे दिल की क्या खबर–डॉ० श्रीमती तारा सिंह

    आपको    मेरे   दिल   की   क्या   खबर आप    तो   अनजाने   रहे    रात   भर   धुआँ-धुआँ  दीखता  आपको  गुम्बदे – मीना1 मेरा  दिले-दाग  आपको  आता  नहीं  नजर   कैसे  सुनाऊँ  दिले – हाल  अपना,  आपको जब  भी  लगती  सुनाने, रात Read More …